बाटला हाउस एनकाउंटर केस के आरोपी आरिज खान को दिल्ली की एक अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है। अदालत ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना है। इस चर्चित एनकाउंटर के बाद आरिज खान फरार हो गया था जिसे साल 2018 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरिज खान इंडियन मुजाहिद्दीन का सदस्य है और साल 2008 में दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद और यूपी की अदालतों में जो धमाके हुए थे उसमें भी इसका नाम था।

आज हम बात कर रहे हैं उस घर की जिसमें यह मुठभेड़ हुई थी और अभी वहां कैसे हालात हैं। बाटला हाउस इलाका दिल्ली के जामिया नगर में स्थित है। यह इलाका काफी भीड़भाड़ वाला है। इस इलाके में दाखिल होने के बाद एक संकरी गली में कुछ दूर अंदर चलने के बाद बना है एल-18 मकान। इस मकान की करीब 60 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़ने के बाद तीसरे फ्लोर पर वो फ्लैट है जहां 19 सितंबर 2008 की सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों के बीच एनकाउंटर हुआ था।

इस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गये थे। उस वक्त दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि एनकाउंटर के दौरान 2 आतंकी भाग गए। इन्हीं में से एक था आरिज खान। इस इलाके की आबादी बेहद घनी है। कई मकानों के छज्जे बाहर निकले हैं और बीच में बिजली के तारों का जाल बिछा है। जिस मकान में यह एनकाउंटर हुआ था आज वो सुनसान पड़ा है।

साल 2008 में सीरियल बल धमाकों से पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 7 मिनट की एक कॉल को रिकॉर्ड किया था। बताया जाता है कि उस वक्त पुलिस की टीम इस कोड को डिकोड नहीं कर पाई थी। बताया जाता है कि स्पेशल सेल की एक टीम बाद में इस कोड को डिकोड करने के बाद एल-18 बाटला हाउस गई थी। इस टीम में तैनात एसआई धर्मेंद्र कुमार ने मोबाइल कंपनी का एग्जीक्यूटिव बनकर बाटला हाउस के इस मकान में दस्तक दी।

दरवाजे पर दस्तक देते ही एक युवक ने दरवाजा खोला था। कहा जाता है कि युवक से बातचीत के दौरान एसआई धर्मेंद्र कुमार ने पूरे कमरे का नक्शा अपनी आंखों में बना लिया था। इसके बाद एसआई नीचे उतरे और फिर स्पेशल टीम के सदस्य तैयारी के साथ यहां आए। इसी दौरान यह एनकाउंटर हुआ था।