2012 Delhi Gang Rape Case Highlights: दिल्ली गैंगरेप केस में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। पटियाला कोर्ट ने सभी आरोपियों के लिए नया डेथ वारंट जारी कर दिया है। जिसमें दिल्ली गैंगरेप मामले के चार दोषियों को फांसी देने लिए तीन मार्च की तारीख मुकर्रर कर दी। उन्हें सुबह छह बजे फांसी दी जाएगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने चारों दोषियों -मुकेश कुमार सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय कुमार शर्मा (26) और अक्षय कुमार (31) को फांसी देने के लिए नए मृत्यु वारंट जारी किए हैं।
दिल्ली की अदालत दोषियों के लिए मौत के नए फरमान जारी करने की मांग करने वाली दिल्ली सरकार और पीड़िता के माता-पिता की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल उच्चतम न्यायालय ने अधिकारियों को यह स्वतंत्रता दी थी कि वे दोषियों को फांसी देने के लिए नए मृत्यु वारंट जारी करने के लिए निचली अदालत से गुहार लगा सकते हैं।
बता दें कि सबसे पहले फांसी देने की तारीख 22 जनवरी तय की गई थी लेकिन 17 जनवरी के अदालत के आदेश के बाद इसे टालकर एक फरवरी सुबह छह बजे किया गया था। फिर 31 जनवरी को निचली अदालत ने अगले आदेश तक चारों दोषियों की फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी।
दोषी मुकेश ने अदालत में कहा कि वह नहीं चाहता कि न्यायाधीश द्वारा नियुक्त न्यायमित्र वृंदा ग्रोवर उसके मामले की पैरवी करें। तब अदालत ने दोषी मुकेश सिंह का पक्ष रखने के लिए वकील रवि काजी को नियुक्त किया। वहीं अदालत को बताया गया कि दोषी विनय शर्मा भूख हड़ताल पर है। इसे लेकर अदालत ने जेल अधीक्षक को कानून के मुताबिक उसका ध्यान रखने के निर्देश दिए।


सबसे पहले फांसी देने की तारीख 22 जनवरी तय की गई थी, लेकिन 17 जनवरी के अदालत के आदेश के बाद इसे टालकर एक फरवरी सुबह छह बजे किया गया था। फिर 31 जनवरी को निचली अदालत ने अगले आदेश तक चारों दोषियों की फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। बता दें कि निर्भया मामले के चारों दोषी तिहाड़ जेल में बंद हैं।
निर्भया गैंग रेप केस में पवन गुप्ता को छोड़ अन्य सभी दोषियों के दया याचिका और पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं। कोर्ट ने इस मामले में अब 14 दिन का समय देते हुए नया डेथ वारंट जारी कर दिया है। इन 14 दिनों में पवन गुप्ता को इन दोनों कानूनी विकल्पों का निपटारा करना होगा।
वहीं, इस मामले में दोषियों को फांसी पर अलग-अलग लटकाने की मांग वाली केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 20 फरवरी को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि इससे निचली अदालत की कार्रवाई में बाधा नहीं आएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट को कहा था कि 17 फरवरी को होने वाली सुनवाई वो अपनी मेरिट के आधार पर करे।
दोषियों के वकील का कहना है कि वह अक्षय के लिए नई दया याचिका लगाएंगे। पवन के पास भी क्यूरेटिव पिटिशन और राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया था कि निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्या मामले में चार दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका का लंबित रहना दोषियों को फांसी के लिए निचली अदालत द्वारा नई तारीख जारी करने की राह में आड़े नहीं आएगा।
Delhi Gang Rape Case 2012: सुनवाई के दौरान बेहोश हो गई थीं जस्टिस भानुमति
निर्भया केस के चार दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की केंद्र सरकार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आर. बनुमथी बेहोश हो गई थीं. जस्टिस बनुमथी के बेहोश होने पर कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई. हालांकि, उनकी तबीयत पहले सही थी, लेकिन सुनवाई के दौरान वह अचानक बेहोश हो गईं.
पीड़ित के माता-पिता और दिल्ली सरकार ने नया डेथ वारंट जारी करने के लिए अर्जी दाखिल की थी। 15 फरवरी को दोषियों को अलग-अलग फांसी देने संबंधी केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र की याचिका लंबित रहने का ट्रायल कोर्ट द्वारा फांसी के लिए नया डेथ वॉरंट जारी करने पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पटियाला हाउस कोर्ट में जज धर्मेंद्र राणा ने सोमवार दोपहर के बाद अपना फैसला सुनाया। उन्होंने एक लाइन में अपना फैसला पढ़ा। जब जज ने अपना फैसला सुनाया तो अदालत में तालियां बजने लगीं।
पटियाला हाउस कोर्ट ने पिछले महीने 7 जनवरी को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में सभी चार दोषियों को फांसी देने के लिए ब्लैक वारंट जारी किया था। हालांकि, एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित रहने की वजह से उन्हें फांसी नहीं दी जा सकी। बाद में ट्रायल कोर्ट ने 17 जनवरी को दोषियों की फांसी की तारीख 1 फरवरी तय की। लेकिन 31 जनवरी को कोर्ट ने इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया था।
14 फरवरी को दोषी पवन ने अदालत से कहा था कि उसने अपने पुराने वकील को हटा दिया है और नए वकील के लिए उसे वक्त की जरूरत है। इसके बाद अदालत ने उसके अधिकारों की बात कहते हुए नया वकील नियुक्त किया था। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने कोर्ट में कहा था- मामले को 7 साल हो चुके हैं। मैं भी इंसान हूं, मेरे अधिकारों का क्या होगा? मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूं, कृपया डेथ वॉरंट जारी कर दीजिए। इसके बाद वे कोर्ट में रो पड़ी थीं। रोते-रोते ही वो अदालत से बाहर निकली थीं।
रवि काजी को कोर्ट ने मुकेश का वकील नियुक्त किया है। कोर्ट ने मुकेश की मां से कहा कि वकील नहीं तय करता कि दोषी को उम्रकैद होगी या फांसी। दरअसल मुकेश की मां ने अदालत से कहा था कि वृंदा ग्रोवर फांसी की सजा को जेल में तब्दील नहीं करवा पा रही हैं इसलिए वो उन्हें बदलना चाहती हैं। बता दें कि रवि काजी दोषी पवन के भी वकील हैं।
वृंदा ग्रोवर ने केस से हटने की इच्छा जताई जिसके बाद उन्हें इस केस से हटा दिया गया। दोषी मुकेश की मां ने दूसरे वकील की मांग की। इसपर कोर्ट ने पूछा कि आप वृंदा ग्रोवर को क्यों बदलना चाहती हैं? वृंदा ग्रोवर बहुत अच्छा काम कर रही हैं....मेहनत कर रही हैं।' दोषी मुकेश की मां ने कहा कि वकील साहब फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील नहीं करा पा रही हैं, फांसी की सजा हमें नहीं चाहिए।
दोषियों के वकील एपी सिंह ने फिर कहा कि दोषियों में से एक की मानसिक स्थिति खराब है। पवन के वकील ने कहा कि, उनका मुवक्किल 7 दिन में याचिका दाखिल नहीं कर सका। एपी सिंह का कहना है कि उन्होंने अक्षय के माता-पिता से दया याचिका दायर करने के लिए कहा, उन्होंने एक अधूरी दया याचिका दायर की थी इसलिए, वह अक्षय की ओर से एक नई दया याचिका दाखिल करना चाहते हैं। दोषी पवन के पिता को कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब बुलाया गया उस दिन आप आए नहीं।
दोषी विनय शर्मा भूख हड़ताल पर है। इसे लेकर अदालत ने जेल अधीक्षक को कानून के मुताबिक उसका ध्यान रखने के निर्देश दिए। विनय के वकील ने अदालत में कहा कि उसके मुवक्किल को अदालत में पीटा गया था और उसके सिर में चोट आई है। वह गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त है इसलिए उसकी मौत की सजा तामील नहीं हो सकती।
इधर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि जब तक सभी के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं वो अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। यहां आपको बता दें कि इससे पहे 22 जनवरी को फांसी की तारीख तय की गई थी और फिर उसके बाद 1 फरवरी को फांसी की तारीख तय की गई। यानी इस वीभत्स कांड के सभी दोषी हर बार किसी ना किसी तरह अपनी फांसी से बचते आ रहे हैं।