गिरिडीह जिले में अपनी सेवा के दौरान निडर IAS विजया जाधव काफी चर्चा में रही थीं। अंतरराज्यीय बालू माफिया, अवैध पटाखा कारोबारी, मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाने वालों, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों और अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने को लेकर विजया जाधव की तारीफ यहां के स्थानीय लोग भी करते हैं।
साल 2015 की आईएएस अफसर विजया जाधव ने अक्टूबर 2017 में गिरिडीह में Sub-divisional Magistrate (SDM) का पद संभाला था। मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली विजया जाधव के लिए झारखंड में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था। विजया जाधव की मां अक्सर किताबें पढ़ा करती थीं और विजया जाधव को भी अपनी मां से ही पढ़ने-लिखने की पहली प्रेरणा मिली।
एक साक्षात्कार में इस निडर आईएएस अफसर ने कहा था कि झारखंड, गुजरात या महाराष्ट्र पूरी तरह विकसित राज्य नहीं हैं। इन राज्यों में एक प्रणाली और बुनियादी ढांचा है, जिसकी यहां कमी है। इसलिए राज्य और झारखंड के निवासियों के लिए बहुत काम है। राज्य की प्रगति के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने में अधिकारियों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।”
बात साल 2018 की है। उस वक्त विजया जाधव मॉर्निंग वॉक वाली ड्रेस में अचानक कुऱैशी मोहल्ले में पहुंच गईं। यहां उन्होंने अवैध गो-तस्करों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी थी। एसडीएम को पूरी फोर्स के साथ देख आसपास के लोगों को होश उड़ गए थे। इस छापेमारी से चारों तरफ अफरातफरी मच गई थी। कत्लखाने में घुसकर उन्होंने पशुपालन ऑफिसरों से मांस का सैंपल लेने के लिए कहा था।
इसके बाद एसडीएम ने यहां से 50-60 की संख्या में गाय और बछड़ों को आजाद कराया था। एक तस्वीर उस वक्त सामने आई थी जिसमें वो गायों को अपने हाथों से खोल कर बाहर निकालती नजर आई थीं। इस कार्रवाई के बाद एसडीएम काफी सुर्खियों में रही थीं।
इसी तरह विजया जाधव अवैध शराब दुकानों पर छापेमारी कर भी चर्चा में रही थीं। बताया जाता है कि जिस इलाके में अवैध शराब बनाया और लोगों को पिलाया जा रहा था उसपर कार्रवाई करने के लिए विजया जाधव ने अपनी एक टीम बनाई थी। अवैध शराब कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए विजया जाधव रात के अंधेरे में हाथ में टॉर्च लेकर निकल गई थीं। इस कार्रवाई के दौरान 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और भारी मात्रा में शराब भी बरामद किया गया था।
साल 2017 में उन्होंने बेंगाबाद में अवैध स्टोन क्रशिंग यूनिट को सील किया था क्योंकि यह यूनिट बिना लाइसेंस के ही संचालित किया जा रहा था।

