देश में जांबाज आईपीएस अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। अपनी बहादुरी के दम पर इन आईपीएस अधिकारियों ने अपराधियों के नाक में दम कर दिया। आज हम बात कर रहे एक ऐसी ही लेडी आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर की। संजुक्ता पराशर को ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ भी कहा जाता है। संजुक्ता पराशर वो हिम्मतवर अधिकारी हैं जिन्होंने 16 आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया। इतना ही नहीं असम में 15 महीनों के दौरान उन्होंने कई आतंकवादियों को जिंदा भी दबोचा। संजुक्ता पराशर साल 2008 में सबसे पहले Makum की Assistant Commandant बनीं।
साल 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैं असम में पली-बढ़ी। मैंने वहां से 12वीं तक की पढ़ाई की। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान मैंने खुद के बारे में जाना..मैं यह जानने में सक्षम हो सकी की मैं आजाद हूं। मैंने खुद की देखभाल करना सीखा।
संजुक्ता पराशर ने बताया कि 23 साल की उम्र में उनके दिमाग में यूपीएससी की परीक्षा में बैठने का विचार आया। साल 2006 में संजुक्ता ने अपने सपने को कड़ी मेहनत से साकार किया। उन्हें उदालगिरी में हुई बोडो और बांग्लादेशियों के बीच की जातीय हिंसा को काबू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। संजुक्ता के बारे में कहा जाता है कि वो हाथों में एके 47 के साथ खुद बीहड़ जंगलों में कॉम्बिंग करती थी।
असम के उग्रवादी संगठनों की ओर से संजुक्ता को जान से मारने की धमकियां भी कई बार मिलती रहीं। कई बार बाजारों में भी उनके खिलाफ पंफलेट चस्पा किए गए। लेकिन ऐसी धमकियों से डरे बिना संजुक्ता पराशर बहादुरी के साथ आतंकियों को उनके सही स्थान पर पहुंचाती रहीं। संजुकता ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं अपना सिर झुकाकर उस काम को करने की कोशिश करती हूं जो मुझे दिया गया है। यही हम कर सकते हैं। मिले हुए काम को अपनी योग्यता के मुताबिक अच्छी तरह करना।’ बता दें कि संजुकता एके- 47 हमेशा अपने साथ रखती हैं।

