दहेज और हत्या जैसे संगीन अपराध के मामले में बिहार पुलिस की ढुलमुल रवैये का बड़ा उदाहरण सामने आया है। राज्य की पुलिस का हाल यह है कि सबूत और आरोपी मौजूद हैं फिर भी पुलिस ने 10 साल में चार्जशीट दाखिल किया है। बिहार पुलिस के इस रवैये से सुप्रीम कोर्ट खफा है और अदालत ने राज्य के डीजीपी से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकात और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने इस मामले में आरोपी बच्चा पांडेय की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने बिहार के डीजीपी और पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर इस देरी की वजह क्या है? कोर्ट ने उक्त दोनों को 4 सप्ताह में अपना जवाब दायर करने को कहा है। अब कोर्ट चार सप्ताह बाद इस मामले की सुनवाई करेगा।
आरोपी को पकड़ने में लगे 21 साल: दरअसल यह मामला वैशाली जिले का है। जिले के राजापाकर थाने में 2 फरवरी 1999 को मृत लड़की के भाई ने अपने जीजा बच्चा पांडे और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और अपनी बहन की हत्या का केस दर्ज करवाया था। केस दर्ज होने के बाद पुलिस के हाथ 21 साल तक आरोपी तक नहीं पहुंच सके। हैरानी की बात यह है कि वो भी तब आरोपी बीएसएनएल में इतने सालों से लगातार नौकरी कर रहा था। 7 जून 2020 को पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार किया।
10 साल बाद दायर की चार्जशीट: इस मामले में हैरान करने वाली एक औऱ बात यह भी है कि पुलिस ने 10 साल की देरी से अपनी चार्जशीट रिपोर्ट दायर की थी। जिसमें उसने कहा था कि पीड़िता की बिसरा जांच में अत्यंत जहरीला पदार्थ पाया गया है और उनके पास आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं। उसके बाद भी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने में 11 साल का और समय ले लिया।
मृतक के भाई का यह था आरोप: मृतक लड़की के भाई का कहना था कि उसने अपने बहन का विवाह 1993 में बच्चा पांडेय से किया था। विवाह के बाद से ही उसकी बहन को दहेज की मांग करते हुए प्रताड़ित किया जाने लगा। उसे 2 फरवरी 1999 को किसी अज्ञात से सूचना मिली कि उसकी बहन को मार डाला गया है।
बच्चा पांडेय व उसके परिजनों ने उन्हें बिना इसकी जानकारी दिए उसकी बहन का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने करीब एक दशक तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने मामले में 10 साल की देरी से 30 सितंबर 2009 को चार्जशीट दायर की थी।
बहरहाल अब इस मामले पर ‘सुप्रीम’ अदालत ने कहा है कि पुलिस की तरफ से की गई देरी परेशान करने वाली है। इस देरी की वजह भी स्पष्ट नहीं है। यह काफी चिंताजनक है। लिहाजा, डीजीपी बिहार और पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रिपोर्ट दायर कर इस देरी का कारण बताएं।’
