क्राइम करने के लिए इस अपराधी को बंदकू या किसी अन्य हथियार की जरुरत नहीं पड़ी। वो लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ करने में माहिर और जेल से फरार हो जाने में भी शातिर रहा। आज बात देश के सबसे बड़े ठग कहे जाने वाले मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव की। इसे उपनाम ‘नटवरलाल’ से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि साल 1987 से लेकर अब तक नटवरलाल 10 बार जेल से फरार हो चुका है। सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त से वो 7 बार फरार हुआ।

मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के बारे में बताया जाता है कि उसका जन्म साल 1913 में बिहार के सिवान जिले के बंगरा गांव में हुआ था। कहा जाता है कि मिथिलेश का जन्म एक जमींदार परिवार में हुआ था हालांकि उसे बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई का शौक नहीं था। एक बार अपने शिक्षक के साथ मिथिलेश की लड़ाई हो गई और फिर उसके पिता ने उसकी पिटाई कर दी।

कहा जाता है कि इसके बाद मिथिलेश अपने घर छोड़ दिया और अचानक गायब हो गया। हालांकि इस संबंध में कुछ लोगों का यह भी कहना है कि मिथिलेश के पिता के एक पारिवारिक मित्र ने एक दिन उसे बैंक से कुछ पैसे निकालने के लिए भेजा था। इसके बाद से मिथिलेश ने उनके फर्जी हस्ताक्षर के जरिए कई बार बैंक से पैसे निकाले। मिथिलेश कुमार ने सबसे पहले 1000 रुपए की चोरी की थी। जब इस बात का खुलासा हुआ तो वो अचानक गायब हो गया।

बताया जाता है कि इसके बाद से पुलिस हमेशा से ही नटरवरलाल को जेल की चहारदीवारियों में कैद करना चाहती थी लेकिन वो किसी ना किसी तरह जेल से फऱार हो जाता था। नटवरलाल कई बार गिरफ्तार हुआ औऱ उसपर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 463, 120-B के तहत केस भी दर्ज हुए।

साल 1953 में पंजाब नेशनल बैंक में हुए एक चीटिंग केस में वो पहली बार पुलिस की पकड़ से फरार हुआ। इसके बाद वो दिल्ली की एक जेल से भी फरार हुआ। साल 1957 में धोखाधड़ी के आरोप में मेरठ में उसे गिरफ्तार किया गया और वो करीब 1 साल तक जेल में रहा। इस दौरान वो अपने एक सहयोगी के जरिए जेलर को कई तरह के गिफ्ट भिजवाया करता था। कहा जाता है कि बाद में इसी जेलर की मदद से नटरवरलाल जेल के अंदर से पुलिस की वर्दी पहन बाहर निकला और एक बार फिर फरार हो गया।

नटवरलाल के नाम से मशहूर मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव का नाम नटवरलाल कैसे पड़ा ये किसी को नहीं मालूम लेकिन नटवरलाल का नाम हर कोई जानता है। नटवरलाल भारत में अबतक का सबसे बड़ा ठग साबित हुआ है। नटवरलाल ने लोगों को बेवकूफ बनाकर दिल्ली के लाल किले, संसद भवन से लेकर ताजमहल तक को बेच दिया और ठगे गए लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। यूं तो नटवरलाल पुलिस की गिरफ्त में 10 बार आया, लेकिन हर बार वो फरार होने में सफल रहा। बताया जाता है कि आखिरी बार नटवरलाल 1996 में दिल्ली के एम्स से पुलिस की पकड़ से फरार हो गया था।

साल 1970 से लेकर 1990 तक वो ठगी में काफी सक्रिय रहा। कहा जाता है कि उसके 50 से भी ज्यादा नाम थे। नटरवलाल कई दुकानदारों को नकली चेक और ड्राफ्ट देकर लाखों रुपए का चूना लगा जाता था। यह भी बताया जाता है कि उसपर 8 राज्यों में 100 से भी ज्यादा केस दर्ज थे। कुछ लोगों का मानना है कि साल 1996 जबकि कुछ अन्य लोगों का मानना है कि साल 2009 में नटवरलाल की मौत हो गई। हालांकि उसी मौत को लेकर पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।