स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकार ने दुतरफा नीति अपनाई। ग्रामीण-कृषि क्षेत्र में सोवियत संघ-प्रेरित समाजवादी नीतियां, लेकिन शहरी-औद्योगिक क्षेत्र को पूरी अमेरिकी छूट प्रदान की गई कि वे अपना जितना चाहें विस्तार करें। कोई रोकटोक नहीं। लेकिन ग्रामीण-कृषि क्षेत्र को कई प्रकार के समाजवादी बंधनों में जकड़ा गया। कृषिजोत की अधिकतम सीमा तय की गई।
जबकि ऐसी सीमा औद्योगिक क्षेत्र के लिए बनाई नहीं गई। तभी तो आज शहरी, औद्योगिक क्षेत्र में अरबपति, खरबपति दिखाई देते हैं। लेकिन ग्रामीण, कृषि क्षेत्र में दृश्य कुछ और ही है।
इस दोमुंही दुतरफा नीति ने कई समस्याओं को जन्म दिया है, जो पहले नहीं थीं। नक्सलवाद भी इसी का परिणाम है। पहले लोग गांव-देहातों में बड़े प्रेम से जाते थे। आज गांव वाले भी गांव छोड़ना चाहते हैं और शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
सीताराम देहाती, भोपाल
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