हर साल १४ फरवरी को प्रेम दिवस के रूप में पश्चिमी देशों का दिया हुआ यह त्योहार भारत में भी दो जुड़े हुए दिल हर्षोल्लास से मनाते हैं। आज के दौर में प्यार के मायने कुछ बदले जरूर हैं लेकिन वह हमेशा की तरह सभी के दिलों में बसा हुआ है।

एक समय था जब हीर-रांझा या रोमियो-जूलिएट आदि की प्रेम कहानियों की भांति ही प्रेम की परिभाषा गढ़ी जाती थी लेकिन अब फिल्मों से लेकर आम जीवन में भी प्रेम की परिभाषा बदलती दिखाई दे रही है। अपने प्यार को हमसफर बनाने के लिए जो लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते हैं उन्हें अपने विवेक के काम लेते हुए कोई मर्यादा लांघने से बाज आना चाहिए।

प्रेम की गहराई में जाकर अपने प्यार को समझने की दरकार है। इकतरफा प्यार ने तो अपने कारनामों से प्यार शब्द को ही जख्मी कर दिया है। प्यार का ऐसा हश्र नहीं होना चाहिए कि लोगों को प्रेम शब्द से घृणा होने लगे।