तवलीन सिंह का लेख ‘मानसिकता पर सवाल’ (12 जुलाई) पढ़ा। तवलीन सिंह एक अच्छी लेखिका हैं, लेकिन अपने इस लेख में व्यक्त उनके विचार एक लेखिका के कम, किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता के से ज्यादा लगे।
यहां मेरा मकसद किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष-विपक्ष में खड़ा होना नहीं है। मैं यह कहना चाहता हूं कि किसी व्यक्ति या पार्टी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति या पार्टी के दोष गिनाने से उसके अपने दोष कम या काबिले-माफी नहीं हो जाते।
क्या अमर्त्य सेन जो अब कह रहे हैं, वह गलत है? क्या उनकी बात को इसलिए नकार दिया जाए कि ऐसा उन्होंने पहले क्यों नहीं कहा। किसी भी दोषी को इस आधार पर दोषमुक्त और सब कुछ करने की छूट नहीं दी जा सकती, क्योंकि पहले भी ऐसा हुआ है।
आसिफ खान, बाबरपुर, दिल्ली
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