संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘2030 तक भारत की आबादी बढ़कर 1.5 अरब और 2050 तक 1.7 अरब होने का अनुमान है, जबकि 2030 तक चीन की आबादी स्थिर बनी रह सकती है। इसके बाद इसमें धीरे-धीरे गिरावट होने की संभावना है।’

संयुक्त राष्ट्र की इसी तरह की एक रिपोर्ट दो साल पहले भी जारी की गई थी, जिसमें अनुमान लगाया गया था कि दोनों देशों की आबादी 2028 तक अलग-अलग 1.45 अरब हो जाएगी। विश्व की मौजूदा आबादी 7.349 अरब है, जो अगले 15 सालों में एक अरब बढ़कर 8.5 अरब हो जाएगी। इसके 2050 तक 9.725 अरब होने का अनुमान है।

यहां गौरतलब है कि भारत की इस विशाल आबादी से प्रारंभ में देश को जनसांख्यिकी लाभांश और युवाओं की उत्पादकता से लाभ मिल सकता है। लेकिन इससे चीन के 9,597,000 वर्ग किलोमीटर की तुलना में भारत के 3,288,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले संसाधनों पर व्यापक दबाव बनेगा। इस आबादी की खातिर अधिक से अधिक रोजगारों के सृजन के लिए अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार करना होगा। क्या भारत आबादी के इस दबाव से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है?

विनय रंजन, मुकर्जी नगर, दिल्ली

 

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