तीनों सेनाओं के दस पूर्व जनरलों ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा है कि आखिर ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू करने में हो रही देरी का कारण क्या है। सैनिकों ने अपने योगदान को याद दिलाते हुए लिखा है ‘ये वही सैनिक हैं जिन्होंने सेवाकाल में राष्ट्र और संविधान के प्रति निष्ठा दिखाई।’
अब इंतजार है कि प्रधानमंत्री इस पत्र का क्या जवाब देते हैं। हालांकि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस विषय पर कहा कि ‘बात चल रही है’ पर अधिकारी इसमें देरी का कारण कुछ तकनीकी अड़चनों को बताते हैं।
अब इस बात में शंका है कि क्या यह वही पीढ़ी है जो ‘जय जवान जय किसान’ का युग देखते हुई बड़ी हुई है। इसमें इतनी संवेदना भी नहीं बची कि उन सैनिकों का दुख समझ सके जो आज अधेड़ उम्र में अनशन पर बैठे हैं।
सरकार को बिना देरी किए एक समान पेंशन व्यवस्था लागू करनी होगी वरना हमारे किसान तो आत्महत्या कर ही रहे हैं, बूढ़े सैनिकों को भी रोज तिल-तिल मरने पर मजबूर होना पड़ेगा।
गुलाम हुसैन, छोटी सरियागंज, मुजफ्फरपुर
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