देश-प्रदेश में पनप रहे अपराध और भ्रष्टाचार का मूल कारण देशप्रेम की भावना में आ रही कमी है। आजकल हर व्यक्ति अपने लिए सब कुछ किसी भी तरह प्राप्त करना चाहता है। अपने घर-परिवार, जाति और धर्म से ऊपर उठ कर निस्वार्थ भाव से काम करने वाले वतनपरस्त नागरिकों की आज बहुत कमी है।
इसका सबसे अधिक नुकसान देश की आम जनता को उठाना पड़ रहा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण जनप्रतिनिधियों का स्वार्थ और उनकी संकीर्ण होती मानसिकता भी है। हमारे प्रतिनिधि वोट बैंक के चक्कर में कभी जातिवाद को बढ़ावा देते हैं तो कभी धार्मिक उन्माद फैला कर समाज में अस्थिरता और असुरक्षा का वातावरण पैदा करना चाहते हैं।
अब सूचना क्रांति के युग में जनता परदे के पीछे चल रही राजनीति को समझती जा रही है। इसके साथ ही चुनाव और उसके बाद राजनेताओं की कथनी और करनी में आते बदलाव भी उसे बहुत कुछ सिखा जाते हैं जिसके नतीजे में जनता का राजनेताओं से मोहभंग होना आवश्यक है।
इसलिए अब जरूरत है राजनीति और नियमों में सुधार करने की ताकि जो भी जनता के साथ विश्वासघात करे उसे तुरंत सजा मिल सके। इसके लिए जनता और राजनीतिक दलों को आगे आकर काम करना होगा। जो भी दल ईमानदारी से सुधारों की वकालत और हिमायत करे जनता को उसी का समर्थन और सहयोग करना होगा।
इसका परिणाम यह होगा कि बाकी राजनीतिक दल भी सुधार की बात करने लगेंगे और एक धारा चल निकलेगी कुछ अच्छा और सकारात्मक करने की।
