झारखंड के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज को छात्र का नहीं मिलना, निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि एक ओर झारखंड के इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने की कगार पर होंगे और दूसरी ओर, झारखंड के इंजीनियरिंग की पढ़ाई की चाह रखने वालों के लिए गहरी निराशा है।
ऐसे छात्रों को घर से दूर जाकर पढ़ाई करनी होगी और ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि निजी इंजीनियरिंग कॉलेज या निजी विश्वविद्यालय मनमानी कर रहे हैं। क्योंकि झारखंड सरकार ने पूर्व में एमओयू समझौता करते समय झारखंड के हित को ध्यान में नहीं रखा, जो बाहर से मैनेजमेंट संस्थान या इंजीनियरिंग कॉलेज या विश्वविद्यालय झारखंड में आए, वे बोर्ड आॅफ गवर्नर्स अपना बाहर से लेकर आए, जबकि झारखंड सरकार को चाहिए था कि बोर्ड आॅफ गवर्नर्स में झारखंड से आधे लोग होंगे और उच्चतम पद- कुलपति या निदेशक का- खुले विज्ञापन द्वारा होना चाहिए था।
दूसरी ओर, जो झारखंड के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज या मैनेजमेंट संस्थान हैं, उनमें गुणवत्ता युक्त पढ़ाई नहीं के बराबर है, सिलेबस पूरा पढ़ाई नहीं होता और गुणवत्ता से युक्त प्राध्यापकों की कमी है, नए-नए स्नातकों को निम्नतम वेतन पर रख कर काम चलाते हैं, तो स्वाभाविक है कि झारखंड के युवा, झारखंड के इन निजी संस्थानों में नहीं पढ़ कर राज्य के बाहर पढ़ना पसंद करते हैं।
क्योंकि झारखंड में सत्र कभी भी समय पर नहीं चलता, और परीक्षाओं का बहिष्कार भी एक कारण है। इसलिए झारखंड सरकार को उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए निजी विश्वविद्यालय और निजी संस्थानों को नए दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए!
भुवन मोहन, रांची
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