हम जानते थे कि गुजरात का पटेल समुदाय हर मामले में बहुत समृद्ध है, पर खुद को पिछड़ा घोषित करने मांग को लेकर बाईस साल के हार्दिक के पीछे उसके खड़े होने से हम हैरत में हैं। शून्य से शिखर तक का सफर तय करने वाले और विदेशों में परचम लहराने वाले समाज के लिए आरक्षण का क्या औचित्य है?

जिस देश में पढ़ा-लिखा नौजवान आरक्षण की बैसाखी पाने के लिए लड़ रहा हो, उस देश के विकसित बनने का सपना देखना बेमानी है। आरक्षण न हुआ, स्वादिष्ट व्यंजन हो गया, सबको चाहिए!

शुभम साहू, सिवनी मालवा, होशंगाबाद

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta