आज छोटी-सी बात भी लोग सहन नहीं कर पाते हैं और गांव-शहर सब हिंसा, अहं और दिखावे में डूब रहे हैं। इससे मुक्ति विनय के आग्रह में ही मिलेगी। विनम्रता ही भविष्य है। इसे साध पाना कठिन है पर जिस किसी ने जीवन में विनम्रता की साधना की वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा है।
विनय की बात तो सब कर लेते हैं पर आचरण में नहीं उतार पाते। यह सहज साधना की तरह हमारे जीवन का हिस्सा बन जाए तो मनुष्यता और भविष्य की बात बनेगी।
विवेक कुमार मिश्र, कोटा
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