धर्म परिवर्तन से किसी सामाजिक समस्या का स्थायी हल नहीं निकलता है। पहले भी बहुत सारे लोगों, खासकर दलितों ने इसलिए धर्म परिवर्तन किया कि उन्हें नए समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा, लेकिन वहां भी उन्हें उसी हीन भावना से देखा गया और वे कभी समाज की मुख्यधारा से जुड़ नहीं पाए। ह
रियाणा के कुछ दलितों द्वारा हाल ही में किया गया धर्म परिवर्तन प्रश्न उठाता है कि आजादी के 68 साल बाद भी उस देश में, जो वैश्विक मानचित्र पर अपना स्थान बनाने की ओर अग्रसर है, दलितों को अधिकारों से क्यों वंचित रहना पड़ता है? निश्चित ही यह देश और सरकार के लिए अफसोस की बात है।
प्रशांत तिवारी, जौनपुर
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