हाल ही में जारी हुए जनगणना के आंकड़े (धार्मिक) चौंकाने के साथ-साथ बेहद गंभीर हैं। क्योंकि देश और राज्य के संसाधन मसलन राशन, शिक्षा और रोजगार काफी सीमित हैं। दूसरी ओर भारत की भौगोलिक परिस्थिति और विविधता सांप्रदायिक संतुलन और राजनीतिक स्थिरता के हिसाब से बेहद ही संवेदनशील है। सवाल है कि इसका सामना कैसे होगा?
राकेश कुमार, करावल नगर, दिल्ली
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