लगभग सात साल की मशक्कत के बाद नेपाल ने अपना नया संविधान तो तैयार कर लिया था पर इसके साथ ही पुराना बखेड़ा संगठित रूप से फिर खड़ा हो गया। इसमें जहां अपनी बहुसंख्यक आबादी (लगभग 49 प्रतिशत) मधेसी के साथ खुले तौर पर भेदभाव किया गया है वहीं जानकार इसे संविधान को समझने की नाकामी बता रहे हैं।

नए संविधान में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का आश्वासन दिया जा रहा है लेकिन नागरिकता के मसले पर उनके साथ भेदभाव किया गया है। भेदभाव यह कि महिला के विदेशी पति से जन्मे बच्चे को नेपाल की नागरिकता नहीं दी जाएगी लेकिन पुरुष के विदेशी महिला से जन्मे बच्चे के मामले में यह नियम लागू नहीं होगा। आखिर यह कैसा संविधान है?
गौरव यादव, सासनी गेट, अलीगढ़

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