प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी अमेरिका यात्रा को दो खास विषयों के संदर्भ में देखा जा सकता है। पहला, संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में सुधार और सुरक्षा परिषद के विस्तार में भारतीय राजनय संबंधी राजनीति। दूसरा, सिलिकॉन वैली के दिग्गजों के सामने भारत के भविष्य की एक तस्वीर प्रस्तुत कर उनसे भारत के डिजिटल सशक्तीकरण में देश की सुरक्षा और उसके हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मोदी सरकार ने निवेशकों के अनुकूल नीतियां अपनाई हैं। मसलन, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भारत से प्रतिभा पलायन को ब्रेन गेन बता कर, स्वेच्छा से रसोई गैस सब्सिडी छोड़े जाने और मंगल मिशन की उपलब्धियां गिनाकर विश्व पटल पर भारत की सुंदर तस्वीर गढ़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया।
वैश्विक शोध और आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत आज दुनिया की जरूरत बनता दिख रहा है। श्रम, बाजार, ज्ञान, निवेश, शांति और सुरक्षा आदि क्षेत्रों में भारत की मजबूत स्थिति है। दुनिया इसे अस्वीकार नहीं कर सकती। यह मानकर चलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारत के प्रति दुनिया का रुख सकारात्मक हुआ है, लेकिन वास्तविक मंंजिल पाना अभी बाकी है।
(पवन मौर्य, लंका, वाराणसी)
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