‘सेल्फी विद डाटर’ का प्रधानमंत्री का सुझाव स्वागतयोग्य है। लेकिन लड़कियों के अनुपात में कमी के मूल कारणों की तरफ देखना और इन्हें दूर करना कहीं ज्यादा जरूरी है। कटु सत्य यही है कि हमारे देश में महिलाएं बेफिक्र होकर नहीं जी सकतीं, न आ-जा सकती हैं। दहेज और यौन-हिंसा की बढ़ती घटनाएं, साथ ही समाज में कथित इज्जत को लेकर भारी चिंता के चलते परिवार में लड़की का जन्म और उपस्थिति चिंताएं लेकर आते हैं।

ताजा सेल्फी विवाद में महिला जासूसी मामले के बहाने प्रधानमंत्री के प्रति कविता कृष्णन की टिप्पणी अशोभनीय है। लेकिन प्रतिक्रिया में कविता कृष्णन और अन्य महिलाओं के खिलाफ जो कहा गया उससे इस विचार को बल मिलता है कि हमारा देश महिलाओं के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता का सम्मान नहीं कर पा रहा।

प्रधानमंत्री बताएं कि हम 16 दिसंबर 2012 की दिल्ली की घटना को कैसे भूल सकते हैं और यह भी कि इतने बड़े अपराध के दोषियों को आज तक दंड नहीं मिला है।
कमल जोशी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

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