एपीजे अब्दुल कलाम की प्रशंसा में जितना कहा गया सब सही है। वे वह सब कुछ थे जो आज उनके बारे में कहा जा रहा है। साथ ही भाग्यशाली भी रहे कि उन्हें भरपूर प्रचार और सम्मान मिला। भारतीय सेना की मारक क्षमता में मिसाइल की भूमिका, भारत का सबसे बड़ा दुश्मन पड़ोसी पाकिस्तान का होना और उसका मुसलमानों की ठेकेदारी लेना; इस नाते पाकिस्तान को माकूल जवाब देने की उग्र राष्ट्रवाद की योजना में संयोग से मुसलिम रक्षा वैज्ञानिक कलाम एकदम फिट न होते तो भारतरत्न और राष्ट्रपति शायद नहीं बन पाते।
विक्रम साराभाई (कलाम के गुरु) या भारत के हाथ से अन्न की भीख का कटोरा छुड़वा देने वाले एमएस स्वामीनाथन को इन्हीं बलैयां लेने वाली सरकारों ने ‘रत्न’ नहीं समझा। तेंदुलकर के जितना योगदान भी स्वामीनाथन का नहीं माना गया। देश की अनुपम सेवा करने वाली प्रतिभा का सम्मान वर्तमान सरकार अगर सचमुच करना चाहे तो स्वामीनाथन से उपयुक्त कोई नहीं है। है तो बताइए भला।
रामलाल भारती, गौरी, रीवा
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