गुजरात प्रशासन और मोदी सरकार के लिए यह दृढ़ता दिखाने का समय है। स्पष्ट है कि पटेल आरक्षण की मांग एक वाहियात-सी मांग है और इसके पीछे केवल शक्ति प्रदर्शन का उद्देश्य निहित है। इस मांग को मानना एक ऐसी गठरी की गांठ को खोलना है जिसके अंदर बहुत से सांप-बिच्छू बंद हैं। किसी का यह कहना कि इस मांग को पूरा न किए जाने पर गुजरात में कमल नहीं खिलेगा, एक गीदड़ भभकी से ज्यादा कुछ नहीं है। अगर ऐसा हुआ भी तो उसके कारण कुछ और ही होंगे।
दूसरी ओर मोदीजी की सरकार जिस तरह जंग के सहारे ‘आप’ सरकार के पीछ पड़ी है वह उनके दल की बौखलाहट ही दिखाता है। एक तो मोदीजी के ‘प्रचारक’ किस्म के चुनावी वादे और दूसरे, उनके नेताओं के बेलगाम वक्तव्य सरकार के अनेक प्रभावी और अच्छे कामों को धूमिल कर रहे हैं। इसका फायदा कांगे्रस को मिल रहा है। इन कुछ मुद्दों पर मोदीजी ध्यान दें तो शायद केंद्र में आगे कमल खिले रहने की संभावना में सांस लौटे।
अशोक गुप्ता, गाजियाबाद
फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta
ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta
