समझना मुश्किल है कि केंद्रीय कर कानून लागू होने के बाद जब केंद्र सरकार राज्यों को होने वाले नुकसान की पांच साल तक भरपाई करने की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है, तो अलग से अंतरराज्यीय आवागमन कर निर्धारित करने की क्या तुक है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू करने के पीछे तर्क है कि पूरे देश में एक तरह की कर प्रणाली होने से वस्तुओं पर उत्पादन लागत घटेगी, विपणन में आसानी होगी और इस तरह वस्तुओं और सेवाओं की कीमत संतुलित की जा सकेगी। अगर प्रस्तावित जीएसटी कानून से यह मकसद पूरा होता नहीं दिख रहा तो उस पर पुनर्विचार से सरकार को क्यों गुरेज होनी चाहिए।
विनय रंजन, मुकर्जी नगर, दिल्ली

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