आज देश के लगभग सभी राजनीतिक दल खुद को आंबेडकर का प्रबल समर्थक सिद्ध करने की होड़ में लगे हैं, लेकिन वे बार-बार उनके नाम के साथ दलित शब्द लगा कर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? आंबेडकर विद्वान होने के कारण संविधान के निर्माता थे, न कि जाति या वर्ग विशेष के होने के कारण। जिस प्रकार अब हरिजन शब्द का प्रयोग नहीं होता, उसी प्रकार दलित शब्द का प्रयोग बंद हो! देखा जाए तो अब इन शब्दों की कोई प्रासंगिकता नहीं है।
आज से पचपन-साठ साल पहले समाज के वर्ग विशेष को एक कार्य विशेष से जोड़ा जाता था, जो अब लगभग समाप्त हो चुका है। दलित शब्द किसके लिए प्रयोग हो रहा है इसे परिभाषित करना होगा। समाज के हर क्षेत्र और जाति में योग्य व्यक्ति हैं, उन्हें किसी भी जाति, धर्म या क्षेत्र से जोड़ना उचित नहीं है।
यश वीर आर्य, दिल्ली
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