मोदी संविधान को सबसे पवित्र राष्ट्रीय ग्रंथ मानते हैं तो इसमें नया क्या है? लेकिन हकीकत यह है कि भारत का संविधान तत्त्वत: पूंजीवादी है। इसमें तमाम जनपक्षीय बातें केवल राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में दर्ज हैं जिन्हें कानूनन लागू नहीं कराया जा सकता।

पूंजीवाद के अनूठे पैरोकार के रूप में उभरे मोदी ने अब तक के भारत के सबसे सयाने राजनेता के रूप में उन्नत पूंजीवादी मुल्कों (उन्हें भारत का बाजार चाहिए) में अपनी साख जमा ली है। लेकिन अच्छे दिन तो आते-आते रह गए। हरेक मतदाता के खाते में मोदी सरकार द्वारा पंद्रह लाख जमा कराने की बात जुमला बन कर रह गई तो बाकी तमाम जुमलों का हश्र क्या होगा? किसान चैनल से क्या किसानों की आत्महत्या का दौर रुक जाएगा?
रोहित रमण, पटना विश्वविद्यालय

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