भाजपा को ऐसा क्या हुआ कि रोजाना नए-नए खुलासे होने लगे? जिस सरकार की वर्षगांठ इतनी धूमधाम से मनाई गई हो, उसे ऐसा क्या ग्रहण लगा कि एक के बाद एक घोटाले सामने आने लगे! सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, स्मृति ईरानी और पंकजा मुंडे के अपराध कितने बड़े हैं, यह तो अगर जांच हुई तभी पता चल पाएगा। पर इन प्रकरणों से भाजपा और प्रधानमंत्री की साख को बट्टा जरूर लग गया है! जिस तरह से मोदीजी गति पकड़े हुए थे, देश और विदेश में छाए हुए थे, उसमें एक रुकावट तो लगी है!

इस मामले में जिस तरह प्रधानमंत्री ने मौन साधा है उससे उनके वादों पर भ्रम होने लगा है! यह सही है कि मोदीजी पर व्यक्तिगत रूप से कोई आरोप नहीं हैं और उन्होंने पिछले एक साल में बिना छुट्टी लिए जी-तोड़ मेहनत की है! उनके अकेले ईमानदार होने से तो काम नहीं चलेगा! बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। ‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’ वाली बात तो फिर अधूरी रह जाती है!
यतेंद्र चौधरी, वसंत कुंज, नई दिल्ली</strong>

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