जिस प्रकार नरेंद्र मोदी का देश में कहीं भी दिया गया भाषण चुनावी होता है उसी प्रकार केजरीवाल का भी। पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में अरविंद केजरीवाल ऐसे बोल रहे थे जैसे वह कोई चुनावी सभा हो। जब वहां सदन में 67 व्यक्ति उन्हीं की पार्टी के थे तो ऐसे भाषण का औचित्य क्या था?

जिस प्रकार का मोदी और केजरीवाल को बहुमत मिला है उसे सार्थक करते हुए वे नाटक न करके एक सामान्य नागरिक के लाभ के लिए काम करें, आपस में तकरार नहीं। वरना जनता कांग्रेस से भी बुरा हाल कर देगी। फिर मतदाता यही कहेगा कभी नहीं मोदी सरकार और कभी नहीं केजरीवाल!
यश वीर आर्य, नई दिल्ली

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