विपक्ष विमुद्रीकरण को सुनियोजित लूट की संज्ञा दे रहा है जबकि सही मायनों में लूट तो टू-जी, थ्री-जी, कोलगेट आदि घोटाले थे। जनता के अरबों रुपए इन घोटालों में लुटे और हजम हुए हैं। विमुद्रीकरण से तो काले धन की सफाई हो रही है, निवेशकों का पैसा इधर-उधर कहीं नहीं जा रहा और न ही कोई उसे लूट रहा है। विनिमय में थोड़ी-बहुत परेशानी हो रही है जो धीरे-धीरे दूर हो जाएगी।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर