प्रवीण कुमार सिंह का लेख ‘हवा में विकास’ (दुनिया मेरे आगे, 16 मई) गुजरात के विकास के बारे में संक्षिप्त जानकारी भर है। यहां का विकास दूर के ढोल सुहावने जैसा है। ज्यादातर गुजराती यह नहीं बता सकते कि विकास क्या है क्योंकि उनके जीवन में कुछ विशेष सुधार नहीं हुआ है। लेकिन वे यहां के भ्रष्टाचार के बारे में जरूर बता सकते हैं कि बिना पैसा दिए कोई काम नहीं होता है, अडानी-अंबानी जैसे पूंजीपतियों का राज चल रहा है।

रिलायंस के उत्पीड़न से तंग आकर जामनगर स्थित रिलायंस पेट्रोलियम फैक्ट्री के पास के नवागांव की महिला सरपंच झाला ज्योत्सना बा ने अपने पूरे परिवार के साथ बीते तेईस फरवरी को आत्महत्या कर ली। क्या उसने किसी खुशी के चलते आत्महत्या की थी? अगर नहीं, तो किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उलटे, इस कंपनी के विस्तार के लिए आसपास के गांवों को उजाड़ने का वीभत्स प्रयास चल रहा है, जिसकी खबर मीडिया में कहीं नहीं आती है।
अशोक कुमार तिवारी, आणंद, गुजरात

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