किताब लिखने की राजनीति की शृंखला में एक और पूर्व नौकरशाह ने चौबीस साल बाद कंधार और गुजरात के दंगों पर नमक छिड़क दिया।
दुलत को कोई जानता भी नहीं और अब जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर आकर ऐसी बात कर रहे हंै, जो उनको विभिन्न जांच आयोगों के समक्ष रखनी थी।
पद से हटने के सालों बाद संबंधित व्यक्ति के जाने के बाद कुछ खुलासा करने का चलन बढ़ता जा रहा है। लेकिन इस मामले में तो उस समय के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जीवित हैं, लेकिन कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।
उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री अब प्रधानमंत्री बन चुके हैं। अब सब कुछ उनके अधीन है।
यश वीर आर्य, दिल्ली
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