आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सरकारी खर्च पर दिए जाने वाले सस्ते भोजन के स्थान का नाम और सरकारी खर्च पर गली-मोहल्ले में खोले जाने वाले छोटे-छोटे अस्पतालों के नाम अपनी पार्टी के नाम पर रखना कतई उचित नहीं है।
एक तरह से यह अपनी राजनीतिक संस्था का सरकारी खर्च पर प्रचार जैसा लगता है, जिसको गैर-कानूनी भी कहा जा सकता है।
दिल्ली में जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं तो उन्होंने भरपेट भोजन, जिसकी शुरुआत कम मूल्यों पर की गई थी उसका नाम ‘जन आहार’ रखा गया था, न कि कांग्रेस भोजनालय।
ऐसा लगता है कि अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार किसी भी हद तक जा सकती है।
आमोद शास्त्री, दिल्ली
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