विश्व की सबसे पुराने ट्रेवल फर्म और दो विश्व युद्धों के दौरान भी बिजनेस में अग्रणी रही थॉमस कुक सोमवार को धराशाई हो गई। फर्म ने होटल, रिसॉर्ट्स और एयरलाइंस कंपनियां चलाईं, जिन्होंने सालभर के भीतर 1.9 करोड़ यात्रियों को 16 देशों की सैर कराई। इससे कंपनी को साल 2018 में 9.6 अरब पाउंड या 12 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। कंपनी के अभी भी करीब 6 लाख यात्री विदेशों की सैर पर हैं इनमें से 1.5 लाख अकेले ब्रिटिश नागरिक हैं।
दिलचस्प हैं कि 1841 में स्थापित हुई कंपनी को विश्व की सबसे बड़ी और पुरानी ट्रेवल कंपनी माना जाता है, जिसके 21,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। हालांकि कपंनी ने 1.7 अरब पाउंड (2.1 अरब डॉलर) के कर्ज में डूबी हुई है। इसी बीच अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने यूके सिविल एविएशन अथॉरिटी से अगले दो सप्ताह में वतनवापसी कार्यक्रम शुरू करने के लिए कहा है। इस कार्यक्रम के तहत 6 अक्टूबर से थॉमस कुक के ग्राहकों को यूके में वापस लाया जाएगा। इसके लिए विमानों का एक बेड़ा विभिन्न देशों में फंसे अपने नागरिकों को वापस लाएगा।
यूके सिविल अथॉरिटी ने अपने एक बयान में कहा कि मौजूदा समय में विदेशी ग्राहक तब तक एयरपोर्ट पर नहीं आए जब तक उनकी उड़ान की वेबसाइट पर पुष्टि नहीं की जाती। बयान में कहा गया कि यूके में थॉमस कुक के ग्राहक अपने वतन वापस लौटने लिए भी अभी एयरपोर्ट पर ना पहुंचे क्योंकि यूके जाने वाली कंपनी की सभी फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं।
इसी बीच थॉमस कुक के सीईओ पीटर फैंकसर ने एक बयान में कहा, ‘मैं लाखों ग्राहकों, हजारों कर्मचारियों, सप्लायर और सहयोगियों से माफी मांगना चाहूंगा जिन्होंने सालों तक हमारा साथ दिया।’ उन्होंने कहा कि यह कंपनी के लिए बहुत दुखद दिन हैं जो हॉलिडे पैकेज में सबसे आगे रही और लाखों लोगों को दुनियाभर की सैर कराने में अग्रणी रही।
क्यों बर्बाद हो गई कंपनी?
बढ़े हुए कर्ज, ऑनलाइन प्रतिद्वंदियों और भू राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते कंपनी को बीस करोड़ पाउंड की तुरंत जरुरत थी। थॉमस कुक के सीईओ ने रविवार को उधारदाताओं और लेनदारों संग लंदन में एक बैठक भी की जिसमें कंपनी को बचाए रखने के लिए एक आखिरी कोशिश की जा सकें, हालांकि वे इसमें असफल रहे।

