त्वरित वृद्धि के लिए ढांचागत सुधारों को जारी रखने का संकल्प लेते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि भारत में 8-9 फीसद वृद्धि दर हासिल करने की क्षमता है और ऊंची वृद्धि दर से ही गरीबी मिट सकती है। जेटली यहां ‘इकनोमिक टाइम्स ग्लोबल बिजनेस समिट’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के खराब हालात में भी भारत मजबूती से खड़ा है तो ढांचागत सुधारों को आगे बढ़ाना अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि सारा ध्यान बुनियादी ढांचे, सिंचाई और कृषि पैदावार पर केंद्रित रहेगा।
उन्होंने कहा- भारत उन कुछ अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जो 2001, 2008 व 2015 के वैश्विक संकटों को झेल गईं। उन्होंने कहा-हम में संभवतया यह क्षमता है कि हम अब तक हासिल दर से ऊंची वृद्धि दर हासिल कर सकें। सात-साढ़े सात फीसद की दर हमारा सर्वश्रेष्ठ दायरा नहीं है। भारत का सामान्य वृद्धि दायरा 8-9 फीसद है और इसी दर से बढेंÞगे तो ही गरीबी से निजात पा सकेंगे।
वित्त मंत्री ने कहा कि एक से अधिक कारक भारत के समर्थन में हैं जिनमें बड़ा मानव संसाधन, प्रशिक्षित लोग व बहुत बड़ा बाजार शामिल है। हम में विनिर्माण बढ़ाने की क्षमता है। हमारे पास नवोन्मेषी कौशल है। हमारी श्रम लागत नहीं बढ़ रही है जबकि चीन में इसमें बढ़ोतरी हो रही है। हम चीन में हो रहे बदलावों के कारकों का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि तेल व जिंस कीमतों में नरमी के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं का बुरा हाल है। चूंकि हम इन जिंसों के शुद्ध क्रेता हैं इसलिए इसमें हमारे लिए फायदा है। इस फायदे को ध्यान में रखते हुए हमें अपने यहां सबसे पहले ढांचागत सुधारों को जारी रखना होगा।
जेटली ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी कानून की जरूरत को समझेगी और उसे संसद के बजट सत्र में राज्य सभा में इसे पारित कराने में मदद करनी चाहिए। संसद का बजट सत्र्र अगले महीने शुरू होगा। उन्होंने कहा, ‘जीएसटी संप्रग का महत्वपूर्ण सुधार है। यदि इसे तैयार करने का श्रेय किसी को देना हो तो यह मैं उन्हीं को दूंगा। अब, यदि लेखक ही अपनी पटकथा के खिलाफ हो जाए तो मैं क्या कर सकता हूं … मैं उनके पास गया हूं, मैंने उनसे बात की। मैंने उन्हें पूरा ब्योरा दिया और मुझे उम्मीद है कि वे जीएसटी पारित कराने के पीछे के तर्क को समझेंगे।’
जेटली ने कहा कि कांग्रेस ने तीन आपत्तियां उठाई हैं जो उसकी मूल भावना के विपरीत है जिसे वह खुद लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को छोड़कर हर पार्टी जीएसटी विधेयक का सक्रिय समर्थन कर रही है। जेटली ने कहा, ‘संप्रग के राजद, राकांपा और जदयू जैसे सहयोगी दल इसका खुलकर समर्थन कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मुझे कोई वजह नहीं दिखती कि कांग्रस को इस विधेयक के बारे में सोचना चाहिए। यदि विधेयक के किसी विचार पर कोई चर्चा करनी है, तो निश्चित तौर पर मैं उनके साथ चर्चा के लिए तैयार हूं। हम दोषपूर्ण कानून बनाकर भावी पीढ़ी पर इसे नहीं थोप सकते।’
जीएसटी में उत्पाद शुल्क, सेवा शुल्क और बिक्री जैसे सभी अप्रत्यक्ष कर समाहित हो जाएंगे और इसमें कर की समान दर का प्रावधान है। यह विधेयक राज्य सभा में अटका पड़ा है क्योंकि कांग्रेस इसमें तीन बदलाव के लिए जोर डाल रही है। यह पूछने पर कि क्या उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा हाल में आयोजित स्वागत समारोह में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से जीएसटी के मुद्दे पर बात की थी, तो जेटली का जवाब नहीं में था।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘यह अनौपचारिक अवसर होते हैं और जरूरी नहीं है कि ऐसे मंचों पर आप चर्चा करें। निश्चित तौर पर मैंने कोई राजनीतिक चर्चा नहीं की।’ उन्होंने कहा कि इससे पहले कई मौकों पर कांग्रेस नेताओं के साथ जीएसटी पर बातचीत की। जेटली ने स्पष्ट किया है कि यह आर्थिक विधेयक भाजपा बनाम अन्य नहीं है। बहुत अच्छा होगा यदि जीएसटी से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक आम सहमति से पारित हो जाए।
उन्होंने कहा, ‘बहुत अच्छा होगा यदि कानून आम सहमति से पारित हों। भारत के कराधान ढांचे को प्रभावित करने वाले इस जैसे कानून को सर्व सम्मति से पारित कराने को हम तरजीह देते हैं, अन्यथा इस पर मतदान किया जा सकता है।’ जेटली ने कहा कि कांग्रेस को छोड़कर अन्य विपक्षी दलों के सहयोग से कोयला, खनन और ऐसे कई महत्वपूर्ण कानून पारित हो चुके हैं।
कांग्रेस की वजह से एक अप्रैल 2016 से जीएसटी लागू करने की सरकार की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। जीएसटी से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में अटका पड़ा है। कांग्रेस ने जो तीन मांगें रखी हैं उनमें जीएसटी दर की अधिकतम सीमा का संविधान में उल्लेख होना चाहिए, वस्तुओं के एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही पर प्रस्तावित एक प्रतिशत अतिरिक्त कर खत्म करना और राज्यों के बीच विवाद सुलझाने के लिए न्यायिक समिति का गठन करना शामिल है।
