SBI Research Report : भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार लगातार तेज हो रही है। एसबीआई रिसर्च की 19 जनवरी 2026 को जारी ताजा रिपोर्ट में यही बात सामने आ रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत अभी दुनिया की चौथी बड़ी इकोनॉमी है और 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, 2030 तक भारत दुनिया के उन देशों में भी शामिल हो सकता है, जिन्हें “अपर मिडल इनकम कंट्री” कहा जाता है।

5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य दूर नहीं

भारत फिलहाल जिस मुकाम पर खड़ा है, वहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। आजादी के बाद भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने में करीब 60 साल लगे। लेकिन इसके बाद विकास की रफ्तार में तेजी आती गई।

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने 2014 में 2 ट्रिलियन डॉलर, 2021 में 3 ट्रिलियन डॉलर और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा हासिल कर लिया। अब अनुमान है कि अगले करीब दो साल में यानी 2027-28 तक भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यही नहीं, इस रिपोर्ट के मुताबिक 2035-36 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने का रास्ता भी साफ दिख रहा है।

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प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ी

सिर्फ देश की कुल आय यानी GDP ही नहीं, आम लोगों की औसत प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। भारत की प्रति व्यक्ति आय 2009 में जाकर 1000 डॉलर पर पहुंच पाई। देश को इस मुकाम तक पहुंचने में 62 साल लग गए, लेकिन इसके बाद 2000 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय 2019 में ही हासिल हो गई। वहीं, 2026 में यह आंकड़ा 3000 डॉलर और 2030 तक 4000 डॉलर के आसपास पहुंचने का अनुमान है।
SBI रिसर्च के मुताबिक 4000-4500 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय का मतलब है कि भारत “अपर मिडल इनकम कंट्री” की कैटेगरी में आ जाएगा, जहां अभी चीन और इंडोनेशिया जैसे देश मौजूद हैं।

ग्रोथ रेट के मामले में शानदार प्रदर्शन

रिपोर्ट में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया के सबसे तेज बढ़ने वाले देशों में शामिल रहा है। 2024 तक के दशक में भारत ग्लोबल ग्रोथ डिस्ट्रीब्यूशन में 95वें पर्सेंटाइल पर पहुंच गया। आसान भाषा में कहें तो दुनिया के ज्यादातर देशों की तुलना में भारत ज्यादा तेजी से आगे बढ़ा है।

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क्या कहते हैं वर्ल्ड बैंक के आंकड़े

वर्ल्ड बैंक देशों को प्रति व्यक्ति ग्रॉस नेशनल इनकम (GNI) के आधार पर चार कैटेगरी में बांटता है – लो इनकम, लोअर मिडल इनकम, अपर मिडल इनकम और हाई इनकम। 1990 में जहां ज्यादातर देश लो या लोअर मिडल इनकम कैटेगरी में थे, वहीं 2024 तक आते-आते हाई इनकम और अपर मिडल इनकम देशों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह दिखाता है कि समय के साथ दुनिया के बहुत सारे देश आर्थिक विकास की सीढ़ी चढ़कर ऊपर आए हैं और भारत भी उसी राह पर है।

2047 तक हाई इनकम वाला देश बनने का लक्ष्य

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर भारत 2047 तक हाई इनकम वाला देश बनना चाहता है, तो प्रति व्यक्ति आय को सालाना करीब 7.5 से 9 प्रतिशत की दर से बढ़ाना होगा। अच्छी बात यह है कि पिछले दो दशकों में भारत की प्रति व्यक्ति आय की ग्रोथ इससे भी बेहतर रही है। यानी यह लक्ष्य हासिल करना पूरी तरह से संभव है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर आर्थिक सुधारों की रफ्तार बनी रही, मैन्युफैक्चरिंग और इनवेस्टमें को मजबूती मिली, तो भारत के लिए यह लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है।

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जर्मनी को पीछे छोड़ने की दहलीज पर

1990 में भारत दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी इकॉनमी था। 2025 तक यह चौथे नंबर पर आ चुका है और 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे पायदान पर पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर भारत का नाम आना सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं होगी, बल्कि ग्लोबल पावर के रूप में उसकी पहचान का संकेत भी होगा।