प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने गुरुवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे से पूछताछ की। यह कार्रवाई कोहिनूर सीटीएनएल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में आइएल एंड एफएस द्वारा 450 करोड़ रुपए की इक्विटी निवेश और कर्ज से जुड़ी है। इस कार्रवाई के मद्देनजर मुंबई के विभिन्न इलाकों- मरीन ड्राइव, माता रमाबाई आंबेडकर मार्ग, दादर और आजाद मैदान थाना क्षेत्रों में धारा 144 लगाई गई। हंगामे की आशंका के मद्देनजर दो सौ से ज्यादा एमएनएस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

मनसे प्रमुख राज ठाकरे धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश होने के लिए अपने परिवार के सदस्यों के साथ गुरुवार को सुबह करीब 11.30 बजे दक्षिण मुंबई में स्थित एजंसी के कार्यालय पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी शर्मिला, बेटे अमित और बहू मिताली भी थीं। राज के ईडी कार्यालय में जाने के बाद उनके परिवार के सदस्य पास के एक होटल में रुके।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के बेटे उन्मेष जोशी को भी इस मामले में ईडी ने तलब किया है। गौरतलब है कि कोहिनूर सीटीएनएल दादर में कोहिनूर टॉवर्स नामक इमारत का निर्माण कर रही है। ईडी ने इस कंपनी की शेयर होल्डिंग और उसके निवेश की बारीकी से जांच शुरू की है। कोहिनूर मिल्स नंबर तीन को खरीदने के लिए शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के बेटे उन्मेष जोशी, एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे और उनके एक अन्य बिजनस सहयोगी ने मिलकर एक कान्सोर्टियम गठित किया था। इसमें आइएल एंड एफएस ग्रुप ने भी काफी बड़ी रकम निवेश की थी।

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आइएल एंड एफएस ने उनकी कंपनी में 225 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसके बाद साल 2008 में इसने कंपनी में अपने शेयर्स को महज 90 करोड़ रुपए में सरेंडर कर दिया। उसी साल राज ठाकरे ने भी अपने शेयर बेच दिए थे और कंसोर्टियम से बाहर निकल गए थे। अपना शेयर सरेंडर करने के बाद भी आइएल एंड एफएस ने कोहिनूर सीटीएनएल को एडवांस कर्ज दिया, जिसे कथित तौर पर कोहिनूर सीटीएनएल चुका नहीं पाया। वर्ष 2011 में कोहिनूर सीटीएनएल कंपनी ने अपनी कुछ संपत्तियां बेचकर 500 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाने के समझौते पर दस्तखत किया। इस समझौते के बाद आइएल एंड एफएस ने कोहिनूर सीटीएनएल को 135 करोड़ का और लोन दे दिया।