कबीर दास का प्रसिद्ध दोहा है, “जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ”, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति सच्ची लगन और परिश्रम से किसी चीज की तलाश करता है, उसे वह जरूर मिलती है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने इस कहावत को सच कर दिखाया है। जिन्हें पैसों की कमी के कारण 13 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। साल 1977 में वह सिर्फ 12.50 रुपये लेकर सूरत पहुंचे और उनका एक ही उद्देश्य था – काम करना और परिवार की मदद करना।
उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और परिश्रम से अपने सपने को सच कर दिखाया है। आज वे अरबों की कंपनी हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स (Hari Krishna Exports) के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उनकी कहानी मेहनत, धैर्य और लोगों पर भरोसे की मिसाल मानी जाती है। अब वे एक अनोखी वजह से मीडिया में चर्चा में बने हुए है। जहां उन्होंने अपने कर्मचारियों को Mercedes-BMW गिफ्ट करके सबको चौंका दिया है।
सावजी ढोलकिया का शुरुआती सफर
सावजी भाई ढोलकिया का जन्म 12 अप्रैल 1962 को गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्हें 13 वर्ष की उम्र में पैसों की कमी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। साल 1977 में वह सिर्फ 12 रुपये 50 पैसे लेकर सूरत पहुंचे।
यहां उन्हें एक हीरा फैक्ट्री में नौकरी मिली, जहां सैलरी मात्र 179 रुपये महीना थी। कम कमाई के बावजूद उन्होंने बचत की आदत डाली और धीरे-धीरे अपने सपने को आकार दिया। उन्होंने बाद में अपने भाइयों के साथ मिलकर उन्होंने हीरा कारोबार की नींव रखी।
सावजी ढोलकिया का करियर (Savji Dholakia Career)
सावजी ढोलकिया ने वर्ष 1992 में अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स (Hari Krishna Exports) की स्थापना की। शुरुआत चार भाइयों के एक छोटे उद्यम के रूप में हुई, जो आगे चलकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड ग्रुप बना। कंपनी का कामकाज रफ डायमंड से लेकर रिटेल तक फैला हुआ है। संगठन की मूल सोच ‘Faith is in the name’ टैगलाइन से जुड़ी है।
सावजी ढोलकिया ने लंबे समय तक कंपनी में फाउंडर, चेयरमैन और सीईओ की भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कंपनी को भारत की जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) से कट और पॉलिश्ड डायमंड एक्सपोर्ट में लगातार 9 वर्षों तक उत्कृष्टता पुरस्कार मिला।
इसके अलावा, वह हरि कृष्णा चैरिटेबल ट्रस्ट (Hari Krishna Charitable Trust) के पार्टनर भी रहे। इस ट्रस्ट के माध्यम से कंपनी ने कर्मचारियों और समाज के लिए अस्पताल, खेल सुविधाएं, लाइब्रेरी, मेडिटेशन सेंटर, रक्तदान शिविर और गुजरात के डुढाला गांव में 17 एकड़ का कृत्रिम जलाशय विकसित किया, जिससे जल संरक्षण और कृषि को लाभ मिला।
सावजी ढोलकिया का कारोबार (Savji Dholakia business)
सावजी ढोलकिया की कंपनी हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का कारोबार हीरा निर्माण और निर्यात पर आधारित है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सूरत (गुजरात) में स्थित हैं।
शुरुआत में चार भाइयों की यह कंपनी समय के साथ एक बड़े, ग्लोबली एक्टिव ग्रुप में बदली। कारोबार रफ डायमंड प्रोसेसिंग से लेकर फिनिश्ड डायमंड और रिटेल तक फैला हुआ है।
इस वजह से काफी चर्चा में है सावजी ढोलकिया
सावजी ढोलकिया ने अपने तीन सीनियर कर्मचारियों को तीन नई मर्सिडीज-बेंज GLS SUV गाड़ियां गिफ्ट कीं, जिनकी कीमत 3 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ये कर्मचारी कोई बाहरी लोग नहीं थे। 25 साल पहले कम उम्र में ही कंपनी से जुड़े थे और आज अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। सवजीभाई के लिए ये गिफ्ट दिखावा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और साथ का दिल से कहा गया धन्यवाद है।
सावजी ढोलकिया की नेटवर्थ (Savji Dholakia Net Worth)
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका कारोबार हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे उनकी संपत्ति लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सावजी ढोलकिया की कुल संपत्ति करीब 12,000 करोड रुपये मानी जाती है। जो डॉलर में लगभग 13,34,638.80 अमेरिकी डॉलर है।
लेकिन असली प्रेरणा ना तो अवॉर्ड में है, ना ही पैसों में – वह इंसान में है
अरबपति होने के बावजूद सावजी आज भी बेहद सरल और जमीन से जुड़े हुए हैं। वे ढोलकिया फाउंडेशन के ज़रिए वह समाज को लौटाने में विश्वास रखते हैं। वह पेड़ लगाने, पानी बचाने और पर्यावरण की रक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे। सावजीभाई की कहानी हमें सिखाती है कि असली सफलता इस बात में नहीं है कि आपने कितना कमाया, बल्कि इसमें है कि आपने कितना दिया। सावजीभाई को भारत सरकार ने 2022 में गुजरात में समाज सेवा के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाजा है।
