संसद में मंगलवार को पेश केंद्रीय बजट को लेकर विशेषज्ञों ने अलग-अलग राय पेश की हैं। दूरदर्शन पर बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री अनिल कुमार ने कहा कि इस बार बजट में सरकार ने मोटे अनाज को लेकर जो कदम उठाया है, वह एक तरह से क्रांतिकारी कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार मोटे अनाज के प्रति लोगों में जागरूकता लाने और उसे किसानों के लिए लाभकारी फसल बनाने के लिए इस वर्ष को मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। उन्होने कहा कि देश के कई हिस्सों में मोटा अनाज किसान पैदा कर रहे हैं, लेकिन उनको पैदा करने का तरीका पुराना होने और मांग कम होने से वह बाजार का हिस्सा नहीं बन पा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब सरकार उसमें नई टेक्नोलॉजी लाने जा रही है। खास तौर पर उसके न्यूट्रिशनल वैल्यू को युवाओं के बीच ज्यादा प्रचार करने की आवश्यकता है। इससे इसकी डिमांड बढ़ेगी और लोग इसका उपयोग करेंगे और इसको खरीदेंगे। इसको लेकर उन्होंने उदाहरण दिया कि कहा मक्का को अब युवा वर्ग खूब अपना रहा है। कहा कि अगर उसके सामने बाजरा और ज्वार की भी उपयोगिता सामने लाई जाए तो उसको भी तेजी से अपनाएगा।
दूसरी तरफ भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के डीन प्रो. राकेश मोहन जोशी ने कहा कि सरकार ने बजट में फूड प्रोसेसिंग को और बढ़ावा देने की बात कही है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। इससे निश्चित रूप से किसानों को फायदा होगा। उन्होंने इसके अलावा एग्रो फॉरेस्ट्री की बात पर जोर दिया। कहा कि गुजरात की तरह पूर्वोत्तर भारत और यूपी, एमपी में भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की बहुत संभावनाएं हैं।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने सेल्फ- हेल्प ग्रुप और कोऑपरेटिव के क्षेत्र में नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई। कहा बजट में वित्त मंत्री ने स्टार्टअप के लिए कर लाभ की अवधि एक साल बढ़ाकर 31 मार्च, 2023 तक करने की बात कही है। स्टार्ट अप के जरिए देश के विकास में काफी मदद मिलेगी। कहा कि यह नई सोच काे प्रोत्साहन देने के साथ देश में रोजगार पैदा करने में मदद देगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए जो बातें कही हैं, उससे किसानों को काफी फायदा होगा। बताया कि बजट में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा है कि फसल आकलन, भूमि रिकॉर्ड, कीटनाशकों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन से कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी में तेजी आने की उम्मीद है।
