Budget 2026 : नया बजट पेश होने में अब गिनती के दिन बचे हैं। फिलहाल इनकम टैक्सपेयर्स की नजर न्यू टैक्स रिजीम पर टिकी है। सरकार ने पिछले बजट (Budget 2025) में इसे आसान और कम टैक्स स्लैब वाले ऑप्शन के तौर पर पेश किया, जिससे बड़ी संख्या में करदाताओं को फायदा हुआ। लेकिन कई जरूरी टैक्स बेनिफिट्स के नहीं होने की वजह से, बहुत सारे टैक्सपेयर्स के लिए यह नया विकल्प उतना फायदेमंद नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस बार बजट में कुछ नए प्रावधान जोड़कर न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बना सकती है। आइए कुछ ऐसे सुझावों और मांगों पर नजर डालते हैं, जिन्हें नए बजट में शामिल किया जाना टैक्सपेयर्स के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

सरचार्ज की लिमिट बढ़ाने की मांग

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संस्था ICAI का कहना है कि न्यू टैक्स रिजीम में फिलहाल 50 लाख रुपये की सालाना आय से ही सरचार्ज लगना शुरू हो जाता है। उनका तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति की आय 50 लाख रुपये से सिर्फ 1–2 लाख रुपये भी अधिक हो, तो उसे पूरी टैक्स देनदारी पर 10 फीसदी सरचार्ज देना पड़ता है। ICAI ने सुझाव दिया है कि अगर इस सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दिया जाए, तो यह सिस्टम ज्यादा तर्कसंगत बन जाएगा।

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स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाए जाने का सुझाव

महंगाई लगातार बढ़ रही है और सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी ज्यादा हो गया है। अभी न्यू टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये है। उम्मीद की जा रही है कि इसे बढ़ाकर 1 लाख या 1.5 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे नौकरीपेशा लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी टैक्सेबल इनकम कुछ कम होने से टैक्स का बोझ घटेगा। कुछ सुझावों में यह भी कहा गया है कि डिफेंस पर्सनल को स्टैंडर्ड डिडक्शन के जरिये थोड़ी ज्यादा राहत दी जानी चाहिए।

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हेल्थ इंश्योरेंस पर मिले टैक्स में छूट

ओल्ड टैक्स रिजीम में सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन न्यू टैक्स रिजीम में यह सुविधा नहीं है। मौजूदा दौर में इलाज और अस्पताल का खर्च काफी तेजी से बढ़ा है, ऐसे में लोग चाहते हैं कि न्यू टैक्स रिजीम में भी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट दी जाए। फिलहाल ओल्ड रिजीम में टैक्सपेयर को अपने, अपने पत्नी और बच्चों के लिए 25,000 रुपये और माता-पिता के लिए अलग से 25,000 रुपये तक के सालाना प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह छूट सालाना 50,000 रुपये तक के प्रीमियम पर मिलती है। यही सुविधा न्यू टैक्स रिजीम में जोड़ने की मांग उठ रही है।

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होम लोन पर टैक्स बेनिफिट की मांग

न्यू टैक्स रिजीम में घर के लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर भी कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। इससे अपना घर खरीदने वालों को उस पूरी रकम पर टैक्स भरना पड़ता है, जो दरअसल उनके हाथ में आने की जगह हर महीने होम लोन इंटरेस्ट के तौर पर उनकी कमाई से निकल जाती है। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि कम से कम पहली बार घर खरीदने वालों को इसमें राहत दी जाए। इससे युवाओं को घर खरीदने में मदद मिलेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को भी सपोर्ट मिल सकता है।

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HRA पर टैक्स में राहत क्यों जरूरी

जो लोग किराये के मकान में रहते हैं, उन्हें पुराने टैक्स सिस्टम में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट मिलती है। लेकिन न्यू टैक्स रिजीम में HRA पूरी तरह टैक्सेबल है। मेट्रो शहरों में घरों के किराए पहले से ही काफी ऊंचे हैं। ऐसे में HRA की पूरी रकम पर टैक्स भरना नौकरीपेशा लोगों के लिए काफी बड़ा नुकसान है। इसलिए यह मांग उठ रही है कि या तो HRA पर आंशिक छूट दी जाए या फिर कोई वैकल्पिक डिडक्शन लाया जाए, ताकि किराए पर रहने वालों पर टैक्स का बोझ कुछ कम हो।

पिछले बजट में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के जरिये टैक्सपेयर्स को काफी राहत दी है, लेकिन ऊपर दिए गए सुझावों को अगर Budget 2026 में जगह मिलती है, तो नई व्यवस्था ज्यादा संतुलित और व्यावहारिक बन सकती है। इससे करोड़ों टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी और न्यू टैक्स रिजीम को अपनाने वालों की संख्या बढ़ेगी।