Inflation, Growth and Budget 2026 : देश का अगला आम बजट पेश होने में अब एक महीने से भी कम वक्त बचा है. यह बजट ऐसे वक्त में आ रहा है, जब अर्थव्यवस्था के दो बड़े इंडिकेटर – महंगाई और ग्रोथ – सरकार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं. एक तरफ GDP ग्रोथ 8% से ऊपर बनी हुई है, तो दूसरी तरफ खुदरा महंगाई दर कई दशकों के निचले स्तर पर है. ऐसे में बजट से उम्मीदें भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं कि सरकार इन पॉजिटव रुझानों का इस्तेमाल किस तरह कर सकती है.

बजट से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति

बजट 2026 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है. मजबूत ग्रोथ यह संकेत देती है कि मांग और निवेश दोनों का सपोर्ट बना हुआ है. वहीं महंगाई में तेज गिरावट ने आम आदमी से लेकर नीति निर्माताओं तक को राहत दी है. हालांकि सरकार के सामने चुनौती ये होगी कि ग्लोबल लेवल पर अस्थिरता और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच ग्रोथ को रफ्तार देते हुए भी किस तरह से फाइनेंशियल डिसिप्लिन को बनाए रखा जाए.

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महंगाई में ऐतिहासिक गिरावट का असर

फरवरी 2025 में जहां कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित महंगाई दर (CPI Inflation) 3.61% थी, वहीं अक्टूबर 2025 तक यह गिरकर सिर्फ 0.25% रह गई. यह मौजूदा सीरीज में साल-दर-साल आधार पर सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. नवंबर में इसमें 46 बेसिस प्वाइंट की बढ़त जरूर हुई और महंगाई 0.71% पर पहुंची, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड साफ है कि कीमतों का दबाव काफी कमजोर पड़ा है. इस गिरावट ने सरकार को बजट में कुछ अतिरिक्त गुंजाइश दी है.

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RBI का बदला नजरिया उत्साहजनक

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी महंगाई को लेकर अपना रुख बदला है. अप्रैल की पॉलिसी में जहां FY26 के लिए CPI इंफ्लेशन का अनुमान 4.0% था, वहीं दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में इसे घटाकर 2.0% कर दिया गया. RBI ने माना कि महंगाई के मोर्चे पर तेज सुधार देखने को मिला है. खास बात यह रही कि FY26 की दूसरी तिमाही में औसत हेडलाइन इंफ्लेशन 1.7% पर आ गया, जो पहली बार RBI के 2% के निचले टॉलरेंस बैंड से कम है.

खाने-पीने की चीजों के दामों में राहत

RBI के मुताबिक महंगाई में आई इस नरमी के पीछे सबसे बड़ा कारण फूड इंफ्लेशन में तेज गिरावट है. सब्जियों, अनाज और मसालों में जोरदार डिफ्लेशन देखने को मिला, जिससे फूड इंफ्लेशन निगेटिव हो गया. वहीं कोर इंफ्लेशन, सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं से जुड़े दबाव के बावजूद, काफी हद तक काबू में रहा. इससे यह संकेत मिलता है कि महंगाई के मामले में अर्थव्यवस्था में गहरे स्तर पर भी कोई समस्या नहीं है.

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बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें

महंगाई में आई तेज गिरावट ने बजट 2026 के लिए माहौल बदल दिया है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार किस तरह ग्रोथ को और मजबूत करने के लिए कदम उठाती है, वह भी राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) से समझौता किए बिना. अगर मौजूदा डिसइंफ्लेशन का फायदा सही तरीके से उठाया गया, तो यह बजट आने वाले समय में मजबूत इकनॉमिक ग्रोथ की दिशा में बड़ी पहल करने वाला साबित हो सकता है.