देश में 50 वर्ष से अधिक उम्र के 11.8 फीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों की संख्या करीब एक जैसी है। मधुमेह पर नियंत्रण के लिए डॉक्टर अक्सर मरीजों को उचित व्यायाम, आहार और शरीर के वजन को नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं। कुछ मरीजों के लिए ये सलाह कारगर साबित नहीं होती और उन्हें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए हर रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। हाल में ही वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों ने इंसुलिन इंजेक्शन से छुटकारा दिलाने के लिए एक कैप्सूल विकसित किया है, उम्मीद है कि इससे मधुमेह से पीड़ित मरीजों को राहत मिल सकती है।
डेनमार्क की दवा निर्माता कंपनी नोवो नोरडिस्क के वैज्ञानिकों के साथ काम कर रहे मैसाच्युसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एमआइटी) के शोधार्थियों ने यह कैप्सूल (दवा) बनाया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह कैप्सूल छोटी आंत की लाइनिंग में इंसुलिन और अन्य दवाएं पहुंचा सकता है जिन्हें सामान्य तौर पर इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है।
मधुमेह दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है क्योंकि आज इसकी चपेट में युवा वर्ग भी है। मधुमेह बीमारियों का एक समूह है, जिसमें खून में ग्लूकोज या ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। ऐसा तब होता है, जब शरीर में इंसुलिन ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें। जिन मरीजों का ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है वे अक्सर बार-बार पेशाब (पॉलीयूरिया) से परेशान रहते हैं। अगर मधुमेह पर ठीक से नियंत्रण न रखा जाए तो मरीज में दिल, गुर्दे, आंखें, पैर एवं तंत्रिका संबंधी कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
मधुमेह के दोनों की प्रकार यानी मधुमेह टाइप 1 और मधुमेह टाइप 2 में अलग से इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ जाती है। दोनों ही परिस्थितियों में इंसुलिन का इंजेक्शन मरीजों को लेना पड़ता है। मरीजों को इस तकलीफ से छुटकारा दिलाने के लिए वैज्ञानिक काफी समय से दवा के रूप में इसे बनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन हर बार उन्हें विफलता हाथ लगी रही थी। वैज्ञानिकों द्वारा शुरुआत में तैयार किए गए इंसुलिन कैप्सूल आमतौर पर पेट मे एसिड के कारण टूटकर प्रभावहीन हो रहे थे और छोटी आंत तक उनकी पूरी डोज नहीं पहुंच पा रही थी।
लेकिन एमआइटी टीम ने एक सुरक्षित और कोटेड दवा बनाने का दावा किया है। इन वैज्ञानिकों का दावा है कि उनकी बनाई हुई नई दवा इतनी स्ट्रॉन्ग है कि यह पेट में बनने वाले एसिड से नष्ट नहीं होगी और छोटी आंत तक बिना किसी नुकसान के पहुंच जाएगी। छोटी आंत तक पहुंचने के बाद ये कैप्सूल इंसुलिन को रिलीज करना शुरू करेगी। फिर इंसुलिन रक्त में आसानी से घुल कर ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।
एमआइटी के प्रोफेसर रॉबर्ट लैंगर ने कहा, ‘हम अपनी प्रयोगशाला के सदस्यों के नई दवा की खोज से खुश हैं। इस कैप्सूल की खोज में प्रयोगशाला के सदस्यों ने आखिर समय में सफलता पाई है, जो भविष्य में मधुमेह के मरीजों समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए काफी लाभदायक होने वाला है। उन्होंने बताया कि इस इंसुलिन कैप्सूल का साइज 30 मिलीमीटर है, जिसमें पर्याप्त इंसुलिन है, जितना कि एक मधुमेह के मरीज के लिए जरूरी है। खास बात यह है कि विकसित इंसुलिन हार्मोन कैप्सूल तेजी से घुलकर खून में पहुंच जाती है, जिससे मधुमेह के मरीज को तुरंत लाभ मिलेगा।’
