ताज़ा खबर
 

ब्लॉग

दुनिया मेरे आगे: वर्चस्व की संस्कृति

इस समाज में ऐसी संरचनाओं को तोड़ने की जरूरत है, जिनमें दूसरे लोगों पर नियंत्रण और वर्चस्व का भाव निहित होता है। इसकी शुरुआत...

राजनीति: उपभोक्तावाद और बच्चे

अभिभावक और बच्चों के बीच स्वस्थ संवाद न होने से बच्चों के जीवन से सामाजिक दुनिया दूर हो गई है। जहां उपभोक्तावादी समाज में...

चौपाल: डाक्टरों की लिखावट

डॉक्टर को दिन में बहुत काम होते हैं, कई मरीज देखने होते हैं, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि दवाई घिसेपिटे अक्षरों में...

चौपाल: भीड़ हिंसा के खिलाफ

आंकड़ों के अनुसार. वर्ष 2014 से मार्च 2018 तक पगलाई भीड़ ने पैंतालीस निरपराध लोगों की हत्या कर दी। दो सौ पिच्यासी निरपराध लोगों...

दुनिया मेरे आगे: प्यास का पैमाना

संभवत पूरे देश में ही कोशिश नहीं हुई और हम बहते पानी के शोधन और संरक्षण को लेकर नाकाम रहे। कई जगहों पर नलकों...

राजनीति: जल प्रबंधन की चुनौती

देश के तमाम शहरों में झीलों और तालाबों के साथ यही हुआ और जल स्रोत खत्म होते चले गए और जलभराव जैसी समस्या विकराल...

वक्त़ की नब्जः वही पुरानी लीक

बेशक कर्नाटक की शुरू से कमजोर, नाकाम सरकार अगले हफ्ते तक गिर जाएगी और भारतीय जनता पार्टी वहां अपनी सरकार बनाने में सफल हो...

बाखबरः गालियां खाके बेमजा न हुआ

साफ हुआ कि आज के आलोचक फिल्म की आलोचना नहीं करते। आलोचना के नाम पर फिल्म का प्रमोशन करते हैं और उसका बाजार बनाते...

तीरंदाजः यादों की बारात

रिश्तों की राजनीति नायब होती है। उसके दांव-पेच ठीक हसीना की जुल्फ के खमो-पेच की तरह होते हैं, जिनको कभी सुलझाया नहीं जा सकता...

दूसरी नजरः सात फीसद वृद्धि के जाल में

गरीब अपनी किस्मत के हवाले हैं। मझोले कॉरपोरेट (4000) फेंके गए टुकड़ों का हिसाब लगाने में लगे हैं। बजट पर अगर कोई चर्चा...

बेबाक बोल- अमर बेल

राहुल गांधी को विरासत सौंपनी हो या फिर अखिलेश यादव को, खास राजनीतिक दलों में अचानक से युवाओं को नेतृत्व देने की हलचल मच...

दुनिया मेरे आगे: अंकों का मायाजाल

यह खबर ज्यादातर लोगों को याद होगी कि एक युवती पर पढ़ाई का बहुत बोझ डाला गया और उसकी रुचि के अनुसार विषय नहीं...

चौपाल: नया रास्ता

खास बात है कि सरकार लोगों की सोच बदलने और अपने विकास के लिए स्वयं-प्रेरित करने की दिशा में भी बढ़ी है। वित्तमंत्री ने...

दुनिया मेरे आगे: मानवीय तकाजा

एक स्त्री, जिसका बच्चा अभी उसी के दूध पर आश्रित है, उसके लिए सार्वजनिक जगह पर कोई ऐसा इंतजाम नहीं है, जहां वह...

राजनीति: रोबोट युग में रोजगार की चुनौती

अगले एक दशक तक रोबोट दो करोड़ लोगों की नौकरियां छीन सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये रोबोट न केवल शहरी क्षेत्रों, बल्कि ग्रामीण...

चौपाल: विलंबित न्याय

बेहतर होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और साथ ही विधायिका यह महसूस करें कि न्यायिक तंत्र की मौजूदा स्थिति देश के अपेक्षित विकास में रोड़े...

दुनिया मेरे आगे: सूखती संवेदनाएं

बुजुर्ग दादा-दादी, माता-पिता को साथ रखना भी लोगों को बोझ लग रहा है। यह बेवजह नहीं है कि आज वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ती जा...

चौपाल: हमारा पर्यावरण

पेड़ लगाते हुए फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर डालने और छपवाने से ही धरती पर हरियाली नहीं आने वाली। हमें पर्यावरण की रक्षा...