वक्त की मार

साठ के दशक की बात है। पीतकाक यानी पीतांबर पान वाले को हब्बाकदल पुल (कश्मीर) के इस पार या उस…

सियासत की किताब

किताब लिखने की राजनीति की शृंखला में एक और पूर्व नौकरशाह ने चौबीस साल बाद कंधार और गुजरात के दंगों…

पहले का प्रश्न

तवलीन सिंह का लेख ‘मानसिकता पर सवाल’ (12 जुलाई) पढ़ा। तवलीन सिंह एक अच्छी लेखिका हैं, लेकिन अपने इस लेख…

चीन का रुख

चीन भारत का कभी दोस्त तो रहा ही नहीं, यह एक नहीं, कई बार प्रमाणित हो चुका है। हमारे प्रधानमंत्री…

अधिग्रहण पर अवरोध

प्रधानमंत्री की अगुआई में हुई नीति आयोग की बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्रियों के रुख से एक बार फिर स्पष्ट…

खनन के खिलाफ

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तमाम कारकों और उनसे निपटने के उपायों पर लगातार बात होती रही है। पर शहरों…

शुचिता की कसौटी

ओडिशा में धरती यानी ‘भूदेवी’ भी तीन दिनों के लिए ‘रजस्वला’ होती है तो राज्य में कृषि से संबंधित सभी…

बहुत काम है

अगर कार्यालयों के परिप्रेक्ष्य में इस वाक्य पर गौर किया जाए कि ‘बहुत काम है’, तो इसके साथ ही फाइलों…

लाचार बचपन

बच्चे हमारे सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन हैं। उनके द्वारा उस समाज को आगे बढ़ाया जाना है जिसमें उनका पालन हो…

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