सुनील दत्त पांडेय
हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय और साहित्यिक संस्था अंत: प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य उत्सव का आयोजन 10 से 12 जनवरी को किया गया। इसमें भारत, नेपाल और भूटान के विभिन्न भाषाओं के साहित्यकार, कलाकर्मी, मंचकर्मी और कहानीकार जुटे। साहित्यकारों, कलाकर्मियों ने इस मंच से संदेश दिया कि साहित्य किसी भी भाषा में लिखा गया हो, वह लोगों की भावनाओं की सही अभिव्यक्ति करते हुए उन्हें एक दूसरे से जोड़ता है। साहित्य का कार्य मनुष्य का निर्माण करना है, विध्वंस करना नही।
साहित्य उत्सव में गीतकार समीर अनजान ने फिल्मी गीतों की चर्चाओंं पर कहा कि एक जमाना था, जब पुराने गीतों का स्वर्ण काल था, हालांकि आज भी अच्छे गीत लिखे जा रहे हैं। वहीं जियो गीता संस्था के संस्थापक गीता के मर्मज्ञ स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने गीता को जीवन प्रबंधन का सबसे बड़ा माध्यम और सार बताया। उन्होंने कहा गीता सबसे बड़ा चिकित्सा शास्त्र है, जो मनोरोगी को दुविधा की स्थिति से उबारता है। डॉ राधिका नागरथ ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज से गीता और वर्तमान युवा पीढ़ी की दिशा और दशा को लेकर कई सवाल किए। उन्होंने कहा कि गीता हमें बेहतर जीवन प्रबंधन के गुर सिखाती है। गीता चिकित्सक, रोगी, पिता-पुत्र, गुरु-शिष्य के संबंधों को रेखांकित करती हुई उनके अधिकार और कर्तव्यों का बोध कराती है। गीता ज्ञान-विज्ञान का सबसे बड़ा अनूठा ग्रंथ है।
इस उत्सव का एक सत्र पर्यावरण को समर्पित था, जिसमें विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद क्लाउड एलवर्स ने कहा कि पर्यावरण और शिक्षा दोनों तभी बच सकते हैं, जब हम उन्हें एक नैसर्गिक स्वरूप में पनपने का मौका दिया जाए। जैसे रसायन युक्त खेती पर्यावरण को दूषित कर रही है, वैसे ही उज्ज्वल भविष्य बनाने के नाम पर दी जा रही शिक्षा युवाओं के समग्र व्यक्तित्व व विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में भारत, नेपाल और भूटान की साझा संस्कृति पर भी चर्चा हुई। नेपाल से आई हिंदी-नेपाली भाषा की जानी-मानी साहित्यकार डॉ श्वेता दीप्ति ने कहा कि भारत और नेपाल की संस्कृति साझी है। दोनों देशों के बीच हिंदी साहित्य की सरिता बहती है, जो दोनों देशों के लोगों के दिलों को जोड़ती है।
साहित्य उत्सव में चित्रकला एवं फोटो प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें लद्दाख की मनमोहक फोटो प्रदर्शनी लगाई गई। फोटो प्रदर्शनी में प्रसिद्ध फोटोग्राफर गुरदीप धीमान की 23 फोटो सहित शशि ठाकुर, सरिता शर्मा , पूजा पंवार के हाथ से बनाए गए कई चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया। इन चित्रों में भारतीय लोक कलाओं के साथ-साथ लद्दाख के प्राकृतिक सौंदर्य और वहां के जीवन दर्शन की झलक देखने को मिली।

