
मनुष्य के मन में महत्तम चीजों को पकड़ कर रखने की लालसा हमेशा से ही बलवती रही है।

मनुष्य के मन में महत्तम चीजों को पकड़ कर रखने की लालसा हमेशा से ही बलवती रही है।

ईर्ष्या इतनी कुत्सित वृत्ति है कि सभा, समाज, मित्र-मंडली, परिवार में, एकांत कोठरी में कहीं भी स्वीकार नहीं की जाती।

बड़े-बुजुर्ग अक्सर यह बताया करते थे कि आसमान में चांद यहां दिख रहा है तो इसका मतलब कि यह समय…

हिंदी के भाषिक प्रयोग के लिए देवनागरी लिपि की अपेक्षा रोमन लिपि के बढ़ते चलन ने एक वर्ग को भारतीय…

सांख्यिकी को मानवीय विज्ञान के तौर पर प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने विश्व भर में ख्याति हासिल की। उनके ‘थ्योरी…

आज भी जब देश की पत्रकारिता के इतिहास के पन्ने पलटें तो लगेगा बाबू बालमुकुंद गुप्त के जिक्र के बिना…

भाषा विज्ञान में कहा गया है कि हिंदी भाषा खुद विचारों को व्यक्त करने की क्षमता रखती है और इसे…

दुनिया के जितने देश महाशक्ति के तौर पर जाने जाते हैं, वे अपनी राष्ट्रीय भाषा में बड़े काम करते देखे…

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे आपस में सुख-दुख साझा करने की जरूरत पड़ती है।

जीवन में मतभेद होता ही रहता है। हर शख्स का स्वभाव अलग होता है और वह प्रत्येक मामले में सामने…

हमारा सार्वजनिक जीवन भी फैशन की दुनिया और बाजार का हिस्सा है। कपड़े पहनने के सलीके का जिक्र यहीं आता…

भले ही हमारी जीवनशैली बदली हो, लेकिन हमारे जीवन की प्रकृति आज भी नहीं बदली है।