
इस बाजारवाद की सबसे भयावह चीज यही है कि मध्यवर्गीय परिवार के अनेक बच्चे अपने अभिभावकों की परेशानियों को समझना…

इस बाजारवाद की सबसे भयावह चीज यही है कि मध्यवर्गीय परिवार के अनेक बच्चे अपने अभिभावकों की परेशानियों को समझना…

हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी गुरु-शिष्य परंपरा है, जिसकी साख अनुशासन और सम्मान पर टिकी है। सहजता जैसी…

आज की तेज-तर्रार जिंदगी में हर कोई दौड़ में शामिल है, मौन ही वह ठहराव है, जो हमें सही दिशा…

जीवन की शांति परिस्थितियों को न केवल ठीक करने की लगन से मिलती है, बल्कि यह सोचने से भी मिलती…

समय प्रबंधन ही समस्त रिश्तों का आधार होता है। जो व्यक्ति हमसे जुड़ा है, वह संवाद की अपेक्षा हमसे रखता…

मौके-बेमौके मिठाइयां खाने- खिलाने की चाह हर किसी को होती ही है। इसीलिए हर तीज- त्योहार से किसी न किसी…

गहराई वक्त के साथ आती है, लेकिन रिश्तों में शुरुआती निवेश की फसल को ही व्यक्ति अक्सर भुनाता रहता है।…

हमारे प्राणों, शरीर और जीवन के मुख्य आधार प्राकृतिक घटकों की स्थिति ही जब अत्यधिक प्रतिकूल हो चुकी हो तो…

सहयोग जैसे दिव्य और भव्य गुण के बल पर समाज और इंसान में एक सहज संबंध विकसित होकर भावना और…

एक तारा अगर टूट जाए तो इससे फलक सूना नहीं हो जाता। इसी तरह किसी स्वप्न के टूटने से जीवन…

बच्चों से अगर पूछा जाए कि आपका प्रिय विषय क्या है, तो अधिकतर गणित, विज्ञान, इतिहास, अंग्रेजी, समाज विज्ञान जैसे…

सुख स्वार्थी बना सकता है, दुख निस्वार्थ होने की ओर प्रेरित करता है। जो प्रफुल्लित है, सुखी है, स्वयं में…