शशिप्रभा तिवारी
पिछले दिनों राजधानी में उत्सव की ओर से ‘अनबाउंड बीट्स ऑफ इंडिया’ समारोह का आयोजन किया गया। इसमें ओड़िशी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथक, मोहिनीअट्टम नृत्य शैली में अंकिता बख्शी, विनोद केविन बचन, मोहित श्रीधर, दीक्षा रावत, आयना मुखर्जी, चित्रा दलवी वारटक और वाणी भल्ला पाहवा जैसे कलाकारों ने नृत्य पेश किया। इंडिया हैबिटैट सेंटर में आयोजित इस समारोह का आरंभ अंकिता बख्शी के ओड़िशी नृत्य से हुआ। गुरु रंजना गौहर की शिष्या अंकिता और विनोद केविन बचन ने नृत्य किया। दोनों शिष्य-शिष्या ने नृत्यांगना रंजना गौहर की नृत्य रचनाओं को पेश किया।
समारोह की शुरुआत में अंकिता ने मंगलाचरण पेश किया। यह रचना ‘जय जय जननी’ पर आधारित थी, जो राग प्रथम मंजरी और एक ताली में निबद्ध था। नर्तक विनोद केविन बचन ने अर्धनारीश्वर में शिव-पार्वती के रूप को पेश किया। यह आदि शंकराचार्य की रचना पर आधारित था, जिसे राग मालिका और ताल मालिका में पिरोया गया था। विनोद केविन की दूसरी प्रस्तुति श्रीमद्भगवत गीता के श्लोक पर आधारित थी। यह राग मालकौंस व अहीर भैरवी और एक ताली में निबद्ध थी। इसमें अर्जुन के भाव को विनोद केविन ने दर्शाया और कृष्ण ने कर्म का संदेश और अपने विश्व रूप का दर्शन दिया। इन नृत्य रचना की संगीत रचना आचार्य बंकिम सेठी की थी।
कुचिपुड़ी गुरु जयराम राव और वनश्री राव की शिष्या आयना मुखर्जी ने भी समारोह में शिरकत की। आयना ने दशावतार पेश किया, जो राग मोहनम और मिश्र चापू ताल में निबद्ध था। इसकी परिकल्पना डॉ वेंपति चिन्नासत्यम ने की थी। आयना ने गुरु वनश्री राव की नृत्य रचना चित्रसभा पेश की। इसमें कैलाश पर्वत पर भृंगी व भूत गणों के साथ नृत्य करते भगवान शिव को उन्होंने नृत्य में दर्शाया, जो भस्म विभूषित, त्रिनेत्री और रूद्राक्ष धारण किए हैं। यह राग गौरी और आदि ताल में निबद्ध थी। स्वाति तिरुनाल की यह रचना राग हंसध्वनि और आदि ताल में निबद्ध था। यह डॉ संध्या पुरेचा की नृत्य रचना थी, जो ‘शंकर श्री गिरिनाथ प्रभु’ पर आधारित थी।
मोहिनीअट्टम नृत्य शैली में वाणी भल्ला ने नृत्य पेश किया। गुरु भारती शिवाजी की वरिष्ठ शिष्या वाणी ने शुद्ध नृत्य का अंदाज मुखचालम में पेश किया। विभिन्न ताल अवर्तनों पर अंग, पद और हस्त संचालन उन्होंने पेश किया। यह सोपानम संगीत के राग मालिका-बेगड़, सावेरी व देसखी में पिरोई गई थी। वाणी ने जयदेव की अष्टपदी ‘ललित लवंग लता’ को नृत्य में पिरोया। यह राग पुरूनीर, बसंत और मध्यमावती में निबद्ध थी। राधा कृष्ण के भावों का यह विवेचन मार्मिक था।
नृत्यांगना दीक्षा रावत और नर्तक मोहित श्रीधर ने कथक नृत्य पेश किया। दीक्षा रावत ने धमार ताल में नृत्य पेश किया। इसके अलावा, ठुमरी ‘बाट चलत’ पर भाव दर्शाया। दीक्षा ने तीन ताल में निबद्ध तराने को भी नृत्य में पिरोया। जबकि, पंडित राजेंद्र गंगानी के शिष्य मोहित श्रीधर ने जयपुर घराने की तकनीकी बारीकियों को नृत्य में पिरोया। उन्होंने तीन ताल में पैरों के काम के जरिए तैयारी और विभिन्न लयकारी को दर्शाया। गोस्वामी तुलसीदास की रचना रूद्राष्टकम में शिव के रूप को उन्होंने चित्रित किया।

