राकेश सिन्हा बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। वे डीयू में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रहे हैं। आरएसएस पर उनके शोध और लेखन ने उन्हें एक प्रमुख विचारक के रूप में स्थापित किया। राकेश सिन्हा कई राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर बहस में अपनी सटीक और स्पष्ट विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर अनेक लेख और पुस्तकें लिखी हैं
सोमनाथ मंदिर के बहाने नेहरू और नरेंद्र मोदी की वैचारिक टकराहट भारत की संस्कृति, राष्ट्रबोध और राज्य की भूमिका पर…
बिहार जनादेश ने सामाजिक यथास्थिति तोड़ी। कल्याणकारी योजनाओं, महिलाओं की अभूतपूर्व भागीदारी और नए आर्थिक वर्गों की चेतना ने राजनीति…
अंधभक्ति व्यक्ति या समुदाय को अनावश्यक समर्पण की प्रेरणा देती है और वह इसे अपने व्यक्ति की उपलब्धि मानने लगता…
राकेश सिन्हा ने भारतीय राजनीति में गिरते स्तर पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मां को गाली…
अंग्रेजों के जाते वक्त आधे से ज्यादा भारतीय गरीबी रेखा से नीचे थे। 1930 में उनकी रोज़ाना आमदनी सिर्फ दो…
राजनीति का अपना स्वभाव होता है। वह सुलभ और आसान रास्ते से सफर करना चाहती है। जाति की पीठ की…
दत्तात्रेय होसबाले ने जो कहा उसका प्रतिबिंब संविधान सभा में विद्यमान है। केटी शाह संविधान सभा के मुखर सदस्यों में…
2014 के बाद भारत में केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, एक वैचारिक क्रांति हुई। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने भारतीय अस्मिता…
भारत ने आतंकवादी कार्रवाई को स्थानीयता के आईने से नहीं देखा, बल्कि इसे राष्ट्र पर हमला माना और इसे अंजाम…
हमने लोकतंत्र को राजनीतिक दलों का अखाड़ा मान लिया है। फिर तो जनतंत्र राजनीतिक अखाड़े के नियमों से ही चलेगा।…
नैतिक सामर्थ्य की जगह भौतिक सामर्थ्य और प्रसिद्धि की लालसा ही चिंतकों, समाज सुधारकों और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के निष्प्रभावी होने…
भारतीय परंपरा में परोपकार, सेवा, दान का एक ही लक्ष्य मानवता है। यह सभी संकीर्णताओं को पराजित करता है। शिक्षा,…