Neighbourhood, Mohalla culture, loneliness, urbanisation, social change
दुनिया मेरे आगे: कभी हम पड़ोसी थे… अब सिर्फ दरवाजों के पीछे लोग – कहां खो गया हमारा वह मोहल्ला?

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें रितुप्रिया शर्मा के विचार।

social media ethics, modern society behaviour, online humiliation
दुनिया मेरे आगे: सोशल मीडिया पर बदनामी का नया रिवाज, दूसरों को शर्मिंदा कर अपनी जीत मानने लगे लोग

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें अविनाश जोशी के विचार।

India, Democracy, Social Change, Unemployment
दुनिया मेरे आगे: शोर-शराबे का दौर, खोती हुई आवाजें, क्या हम ठहरकर खुद को देख पाएंगे? गैजेट्स के बीच अकेला इंसान

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें पवन शर्मा के विचार।

artist responsibility, संवेदनशील कला, creative thinking
दुनिया मेरे आगे: कला दिलों को जोड़ती है… एक कलाकार की संवेदनशील दुनिया से जीवन को सीखने वाली कहानी

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें एकता कानूनगो बक्षी के विचार।

forgiveness psychology, maafi kab deni chahiye
दुनिया मेरे आगे: माफ करना सच में आसान है? दर्द, सम्मान और न्याय के बीच कैसे करें फैसला?

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें महिमा सामंत के विचार।

Overpopulation, resource crisis, environmental protection, consumerism
दुनिया मेरे आगे: जरूरत से ज्यादा चीजें कैसे ला रही हैं संसाधनों का संकट, खतरे में धरती का भविष्य

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें संदीप कुमार सिंह के विचार।

AI and life, technology overload, no peace in tech world
दुनिया मेरे आगे: दिमाग उम्र से नहीं, जिज्ञासा न होने से बूढ़ा होता है, सक्रिय सोच कैसे मस्तिष्क को जीवनभर युवा बनाए रखती है

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें ममता कुशवाहा के विचार।

Elderly, grandchildren, loneliness, family life, mental health
दुनिया मेरे आगे: घर में बच्चे हैं तो बुजुर्गों की सांसों में रहती है ताजगी, पीढ़ियों का यह रिश्ता सिर्फ स्नेह नहीं, जीवन की सबसे बड़ी थेरैपी है

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें अशोक कुमार के विचार।

Importance of creativity, creativity and life, creativity
दुनिया मेरे आगे: जीवन की राह पर हर अनुभव एक सबक है, ठहरना नहीं, बस चलना है, चलते ही जाना है

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें मनीषा मंजरी के विचार।

New Education Policy 2020 | hindi controversy | rss education wing
दुनिया मेरे आगे: राष्ट्रीय शिक्षा नीति तो बनी, अमल कहां? शिक्षा सुधार के पांच साल बाद का सच — बदलाव कब दिखेगा?

पांच साल बाद भी, भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन में अभी भी खामियां हैं। क्या यह वास्तव…

Life preparation and emotional strength in tough times
दुनिया मेरे आगे: क्या हम जिंदगी के तूफान के लिए तैयार हैं? जब सब सामान्य होता है, तब ही असामान्य समय की परीक्षा शुरू होती है

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें प्रभात कुमार के विचार।

human sensitivity, dying compassion, power of words
दुनिया मेरे आगे: अब ‘हत्या’ सुनकर दिल नहीं कांपता, हृदय विदारक शब्द अब सामान्य लगने लगे हैं — यही सबसे बड़ा खतरा है

जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें मोहम्मद जुबैर के विचार।

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