दिल्ली से नोएडा और नोएडा से दिल्ली सफर करने वाले यात्रियों को एक बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के बुधवार को सुनाए गए DND फलाईवे को टोल फ्री करने के फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि वह एक ऑडिटर की नियुक्ति करेंगे या एक नियंत्रक और महालेखा परीक्षक को नोएडा टोल ब्रिज
कंपनी लिमिटेड के खातों की जांच करने के लिए कहेंगे। वहीं अदालत इस पर अपना आदेश दिवाली की छुट्टियों के बाद 6 नवंबर के बाद पारित करेगी। इससे पहले बुधवार को, इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने नोएडा रेज़ीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन द्वारा 2012 में दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने टोल लेने को अवैध बताया और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि यह आगे से नहीं लिया जा सकता। वहीं कंपनी ने यह तर्क दिया कि वह अभी तक अपनी परियोजना और रिटर्न की कुल लागत की वसूली नहीं कर पाई है, जिसमें कि एक प्रावधान शामिल है कि कंपनी उपयोगकर्ता शुल्क से अपनी पूरी परियोजना का 20 प्रतिशत हिस्सा हर साल वसूलेगी। हालांकि उच्च न्यायालय ने कहा कि संचालन और रखरखाव खर्च की राशि लगातार बढ़ रही है इसलिए कुल परियोजना लागत की गणना विधि मनमानी और सार्वजनिक नीति का विरोध है। उच्च न्यायालय ने समझौते की उस संबंधित धारा को खत्म कर दिया है जिसके तहत कंपनी अपनी लागत और उपयोगकर्ता शुल्क से वसूली की गणना करती है।
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