Imran Pratapgarhi: राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, ‘सरकारी भाषण की मजबूरियां होती हैं, सरकार की तारीफ करनी पड़ती है, लेकिन जिस एक शब्द के इर्द-गिर्द पूरा भाषण बुना गया था वो था अमृतकाल. सभापति महोदय छात्र नौकरी मांगने पर लाठियां खा रहे हैं, दो जून की रोटी मुहाल है, पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य चोपट कर दिया है और देश को बताया जा रहा
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